रिपोर्ट : एनसीडी देता है ज्यादा ब्याज पर सावधानी से करें निवेश
एफडी पर ब्याज घटने और शेयरों में उतार-चढ़ाव के कारण एनसीडी बेहतर निवेश विकल्प बन गया है, लेकिन इस पर कुछ जोखिम भी रहता है। एनसीडी में सुरक्षित निवेश का तरीका बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
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कोरोना संक्रमण घटने के बाद कई कंपनियों ने बाजार से पूंजी जुटाने के लिए गैर परिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडी) जारी किए हैं। एफडी पर ब्याज घटने और शेयरों में उतार-चढ़ाव के कारण एनसीडी बेहतर निवेश विकल्प बन गया है, लेकिन इस पर कुछ जोखिम भी रहता है। एनसीडी में सुरक्षित निवेश का तरीका बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
निवेशकों से लिए कर्ज पर मिलता है ब्याज
आनंद रथी वेल्थ मैनेजमेंट के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज ने बताया कि कॉर्पोरेट कंपनियां निवेशकों से पैसे जुटाने के लिए एनसीडी जारी करती हैं, जो एक तरह का ऋण पत्र होता है। इसमें 3, 5 या 10 साल के लिए पैसे लगाए जा सकते हैं। अधिकतर एनसीडी 1,000 रुपये के गुड़क में जारी होते हैं। ये डिबेंचर लॉक इन पीरियड के बाद जारीकर्ता कंपनी के इक्विटी शेयरों में तब्दील नहीं हो पाते, लिहाजा इन्हें गैर परिवर्तनीय डिबेंचर्स कहा जाता है। कंपनियां निवेशकों से जुटाए धन पर उन्हें ब्याज का भुगतान करती हैं। इसे सीधे जारीकर्ता कंपनी से या एक्सचेंज पर भी खरीदा जा सकता है। कुछ कंपनियां 8 साल के लिए भी निवेश का विकल्प देती हैं। सभी एनसीडी एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होते हैं।
3 प्रतिशत ज्यादा ब्याज मिलता है एनसीडी पर एफडी के मुकाबले
- 3000 करोड़ की एनसीडी जारी करेगी भारत पेट्रोलियम
- पीएनबी हाउसिंग लाएगी 2,000 करोड़ की एनसीडी
समय से पहले धन की निकासी मुश्किल
लॉकइन पीरियड से पहले एनसीडी से निकासी करना चाहते हैं, तो एक्सचेंज पर नया खरीदार ढूंढना होगा। एक बार बिक्री के बाद कंपनियां इसे परिपक्व होने से पहले वापस नहीं लेती हैं। एनसीडी के मामले में निवेशक नए खरीदार को बेचकर ही इससे बाहर निकल सकता है। इस पर बैंक एफडी के मुकाबले 2 से 3% तक ज्यादा ब्याज भी मिलता है, जो निवेशक की इच्छानुसार कंपनियां मासिक, छमाही, सालाना या परिपक्वता पर एकमुश्त भुगतान करती हैं।
रिटर्न पर नहीं मिलता है टैक्स छूट का लाभ
एनसीडी में निवेश पर आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट नहीं मिलती है। डीमैट खाते से खरीदे गए एनसीडी में स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं होती है, लेकिन एक्सचेंज से फिजिकल फॉर्म में खरीद हुई है तो टीडीएस कटेगा। इतना ही नहीं एनसीडी पर सालाना 5,000 रुपये से ज्यादा ब्याज पर भी टीडीएस लगता है। एनसीडी को खरीद के एक साल के भीतर बेचे जाने पर निवेशक को आयकर स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ेगा। हालांकि, एक साल के बाद बेचने पर बिना इंडेक्सेसन लाभ के 10 प्रतिशत टैक्स और इंडेक्सेसन लाभ के साथ 20 प्रतिशत की दर से टैक्स चुकाना पड़ेगा।
निवेश से पहले बरतें पूरी सावधानी
- एनसीडी में निवेश के लिए डीमैट खाता जरूरी है।
- लॉकइन पीरियड सोच समझकर चुनें, क्योंकि बीच में इसे वापस नहीं कर सकते हैं।
- एनसीडी पर ब्याज दर पहले ही तय हो जाती है, जो आखिर तक समान रहती है
- पैसे लगाने से पहले यह जरूर जान लें कि एनसीडी सिक्योर्ड है अथवा नहीं। सिक्योर्ड एनसीडी पर निवेशक को कंपनी की संपत्ति बेचकर पैसे वसूलने का अधिकार मिलता है।
- कंपनी किस उद्देश्य के लिए पैसे जुटा रही। अगर वह कर्ज चुकाना चाहती है, तो ऐसी एनसीडी से दूर ही रहें, जबकि कारोबारी विस्तार में पैसे लगने हैं, तो निवेश करना बेहतर होगा।
सिर्फ रेटिंग पर न करें भरोसा
निवेशक एनसीडी खरीदते समय सिर्फ उसकी रेटिंग देखकर ही भरोसा न करें। बेहतर होगा कि ऐसे कॉर्पोरेट की एनसीडी पर दांव लगाया जाए जिसका प्रबंधन और कामकाज भी भरोसेमंद हो। इसका कारण यह है कि आज जो रेटिंग किसी एनसीडी को मिल रही है, जरूरी नहीं अगले 10 साल तक वही रेटिंग बरकरार रहे। कंपनी की पिछले कुछ वर्षों की रेटिंग भी देखनी चाहिए। कंपनी के कारोबार डाइवर्सिफाई हो तो निवेश पर जोखिम कम रहता है। - मनोज जैन, निवेश सलाहकार