पीएम के डिजिटल इंडिया अभियान के खिलाफ और गरीब विरोधी है ट्राई की आईयूसी समीक्षा: जियो
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रिलायंस जियो ने ट्राई द्वारा इंटरकनेक्शन प्रयोगकर्ता शुल्क (आईयूसी) की समीक्षा को गरीब विरोधी बताया है और कहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया अभियान के खिलाफ है।
जियो ने आईयूसी को खत्म करने की समय सीमा से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को मनमाना और गरीब विरोधी करार दिया है। जियो ने कहा कि यह कानूनी तौर पर भी गलत है। ट्राई पर निशाना साधते हुए जियो ने कहा कि आईयूसी पर उसके रवैये से नियामक की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इससे दूरसंचार क्षेत्र के निवेशकों का भरोसा भी डगमगाएगा। ट्राई की समीक्षा के बाद जियो ने दावा किया कि एक जनवरी, 2020 के क्रियान्वयन की तारीख में किसी तरह के बदलाव से मुफ्त कॉल का दौर समाप्त हो जाएगा और शुल्क बढ़ा दिए जाएंगे, जो कि यह उपभोक्ताओं के हित में नहीं होगा।
फिलहाल छह पैसे प्रति मिनट है आईयूसी चार्ज
मालूम हो कि किसी दूसरी कंपनी के नेटवर्क पर अपने ग्राहक के कॉल को पूरा करने के लिए दूरसंचार ऑपरेटर को भुगतान करना पड़ता है। इसमें प्रतिद्वंद्वी नेटवर्क को आईयूसी देना पड़ता है, जो फिलहाल छह पैसे प्रति मिनट है।
ट्राई द्वारा आईयूसी को समाप्त करने की समय सीमा को जनवरी, 2020 से आगे बढ़ाने के लिए समीक्षा की जा रही है। इस वजह से जियो ने अपने ग्राहकों पर छह पैसे प्रति मिनट का शुल्क लगा दिया है।
जियो का आरोप है कि प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया पर जोर दे रहे हैं, वहीं 'आईयूसी' लगाकर लोगों को इस अधिकार से दूर किया जा रहा है। जियो ने कहा कि कुछ ऑपरेटरों के पास 2जी नेटवर्क से 4जी में अपग्रेड नहीं करने के कई बहाने हैं। ये ऑपरेटर टूजी ग्राहकों से वॉयस कॉलिंग का शुल्क वसूलते हैं जबकि जियो के 4जी नेटवर्क पर यह नि:शुल्क है।
कंपनी का आरोप है कि कुछ दूरसंचार ऑपरेटर चाहते हैं कि टूजी का नेटवर्क सदा बना रहे। ऐसे में देश के 47 करोड़ से ज्यादा ग्राहक जो 2जी नेटवर्क से जुड़े हैं, डिजिटल क्रांति के लाभ से वंचित रह जाएंगे।