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तेल पर उत्पाद शुल्क घटने से बढ़ेगा वित्तीय घाटा, मूडीज ने दी चेतावनी 

Mon, 18 Jun 2018 12:31 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Mon, 18 Jun 2018 12:31 PM IST
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Rating agency Moody says Decrease in excise duty on Petrol and diesel will increase fiscal deficit

पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में किसी भी प्रकार की कटौती से वित्तीय घाटे पर तब तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जब तक कि खर्च में इसके बराबर कटौती न की जाए। यह चेतावनी रेटिंग एजेंसी मूडीज ने दी है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें बढ़ने के बाद बढ़ती जा रही पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटाने को सरकार पर उत्पाद शुल्क घटाने के लिए दबाव बढ़ रहा है।

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सरकार के आंकड़े के मुताबिक पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में हर एक रुपये की कटौती से राजस्व की वसूली में करीब 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। मूडीज ने कहा कि देश की संप्रभु साख तय करने में वित्तीय घाटा कम करने की कोशिशों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा। भारत की सबसे बड़ी चुनौती इसकी वित्तीय ताकत है, जो बीएए रेटिंग वाले अन्य देशों के मुकाबले कम है।
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मूडीज के इन्वेस्टर्स सर्विस वीपी और सॉवरेन रिस्क ग्रुप के वरिष्ठ क्रेडिट अधिकारी विलियम फोस्टर ने कहा कि राजस्व में किसी भी प्रकार की गिरावट (पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कटौती सहित) के विरुद्ध उसकी बराबर राशि में खर्च में कटौती करनी होगी, तभी वित्तीय घाटा कम करने की तरफ बढ़ा जा सकता है।

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13 साल बाद सुधारी देश की रेटिंग

मूडीज ने पिछले साल 13 साल से अधिक अवधि के बाद भारत की संप्रभु साख को सुधार कर बीएए2 कर दिया है और परिदृश्य को स्थिर रखा। रेटिंग में सुधार करते हुए मूडीज ने कहा था कि लगातार आर्थिक और सांस्थानिक सुधारों से देश के विकास की संभावना सुधरी है।

विशाल सरकारी वित्तीय घाटा और कर्ज के भारी बोझ के कारण देश की साख के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसकी वित्तीय ताकत है। उदाहरण के लिए भारत का साधारण सरकारी कर्ज और जीडीपी का अनुपात करीब 70 फीसदी है। इसके मुकाबले बीएए रेटिंग वाले अन्य देशों का औसत करीब 50 फीसदी है।

फोस्टर ने कहा कि भारत के वित्तीय पहलुओं के मजबूत होने और समग्र संप्रभु क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार के लिए वित्तीय घाटा कम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को बरकरार रखना अत्यधिक महत्वपूर्ण होगा।

3.3 फीसदी वित्तीय घाटे का अनुमान

कारोबारी साल 2018-19 में सरकार ने वित्तीय घाटा को घटाकर जीडीपी के 3.3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले कारोबारी साल में 3.53 फीसदी था। चार साल के अंतराल के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मुख्य ब्याज दर में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी किए जाने के बारे में पूछे जाने पर फोस्टर ने कहा कि रेटिंग के लिहाज से इससे महंगाई कम करने और अधिक टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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