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जेपी इंफ्रा को दिवालिया घोषित करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल
Updated Mon, 04 Sep 2017 01:13 PM IST
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supreme court
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जेपी इंफ्राटेक से फ्लैट खरीदने वाले बॉयर्स को राहत देते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच द्वारा दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर फिलहाल स्टे लगा दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर लगाया है जिसको जेपी इंफ्राटेक से घर खरीदने वालों ने दायर किया था।
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The Supreme Court stays the Allahabad NCLT (National Company Law Tribunal) order declaring Jaypee as insolvent.
— ANI (@ANI) September 4, 2017
32 हजार बॉयर्स ने लगाई थी गुहार
जेपी ग्रुप से फ्लैट खरीदने वाले 32 हजार बॉयर्स ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि वो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल की इलाहाबाद बेंच के दिवालिया घोषित करने के फैसले पर तत्काल रोक लगाएं। बॉयर्स ने चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच के सामने याचिका दायर करके जल्द सुनवाई करने को कहा था।
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बॉयर्स की तरफ से याचिका दायर करते हुए सीनियर वकील अजीत के सिन्हा ने कहा कि एनसीएलटी के आदेश के बाद कार्पोरेट मंत्रालय ने घर खरीदने वाले बॉयर्स से दिवालिया कानून के सेक्शन 14 के तहत एक फॉर्म भरने के लिए कहा है। अगर बॉयर्स यह फॉर्म भर देते हैं तो फिर वो किसी भी उपभोक्ता अदालत में कंपनी के खिलाफ केस दर्ज नहीं कर पाएंगे।
प्राधिकरण के पास है जमीन का मौलिक अधिकार
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में दी गई जमीन 90 साल की लीज पर है। लीज होल्ड होने के कारण मालिकाना हक प्राधिकरणों के पास ही है।ऐसे में कोई भी बैंक या संस्था तब तक यहां की किसी भी संपत्ति की नीलामी नहीं कर सकती, जब तक कि प्राधिकरण से एनओसी न ले ले। प्राधिकरणों का कहना है कि किसी भी संपत्ति की नीलामी की अनुमति देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्राधिकरण और खरीदारों का पैसा न डूबे।
ऐसे में अगर जेपी इंफ्राटेक के नाम पर आवंटित संपत्ति की नीलामी का आदेश होता है तो भी प्राधिकरण की मर्जी के बिना बैंक नीलामी नहीं कर सकेगा। यमुना प्राधिकरण के मुताबिक जेपी इंफ्राटेक के नाम पर यमुना एक्सप्रेसवे ही है। नोएडा में स्थित एलएफडी वन (विश टाउन, अमन आदि) आदि भी जेपी इंफ्राटेक के नाम पर है।
यमुना की तरह नोएडा में भी प्राधिकरण की एनओसी के बिना किसी भी संपत्ति की नीलामी नहीं हो सकती है।