जेपी ग्रुप को सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, 31 दिसंबर तक जमा करें 275 करोड़ रुपये
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दिवालिया होने की कगार पर खड़ी रियल एस्टेट कंपनी जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक हर हाल में 275 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट में जमा करने पड़ेंगे। कोर्ट ने कहा है कि ग्रुप के निदेशकों को पैसे जमा करने के लिए काफी बार कहा जा चुका है, लेकिन अभी तक कंपनी ने एक रुपया भी जमा नहीं किया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले की अगली सुनवाई वो 10 जनवरी को करेगा।
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दिवालिया होने की कगार पर खड़ी रियल एस्टेट कंपनी जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक हर हाल में 275 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट में जमा करने पड़ेंगे। कोर्ट ने कहा है कि ग्रुप के निदेशकों को पैसे जमा करने के लिए काफी बार कहा जा चुका है, लेकिन अभी तक कंपनी ने एक रुपया भी जमा नहीं किया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले की अगली सुनवाई वो 10 जनवरी को करेगा।
निदेशक, प्रमोटर नहीं बेच सकते अपनी संपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा है कि कंपनी के प्रमोटर और स्वतंत्र निदेशक पैसा जमा करने के लिए अपनी या परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्ति को बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं बेच सकेंगे।
Supreme Court also made it clear that the promoters and independent Directors of Jaypee group cannot sell any property belonging to them and also their family members, without prior court permission.
— ANI (@ANI) November 22, 2017
32000 खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए रिकॉर्ड जमा करवाए कंपनी
आईआरपी को कंपनी के प्रबंधन का पूरा जिम्मा सौंपा गया है। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील शेखर नफाड़े को आईआरपी की सुनवाई के लिए अमाइकस क्यूरी बनाया गया है। शेखर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक प्रस्ताव तैयार करेंगे।
जेपी एसोसिएट व जेएसडब्लू अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने को तैयार
कर्ज में डूबे जेपी एसोसिएट ने कहा है कि वह जेएसडब्लू की मदद से जेपी इंफ्राटेक के अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने को तैयार है। जेपी समूह की कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट लि. (जेएएल) ने यह भी कहा है कि जेपी इंफ्राटेक लि. (जेआईएल) के पास देनदारी से ज्यादा संपत्ति है, इसलिए उसे इस समस्या के हल में कोई दिक्कत नहीं होगी।
बांबे स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में जेएएल ने कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल, इलाहाबाद द्वारा नियुक्त आईआरपी के जारी जेआईएल संकट के हल के लिए आगे आने के प्रस्ताव के पक्ष में वेदांता सहित कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। अत: उसे अपने समूह की कंपनी को समस्या से उबारने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।