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यूपी में फेल हुआ रेरा कानून, आई 4300 शिकायतें पर नहीं हुआ ज्यादातर का भी निस्तारण
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 03 Jul 2018 03:15 PM IST
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केंद्र सरकार द्वारा रियल इस्टेट बिल को पूरे देश में लागू किए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसका फायदा उत्तर प्रदेश की जनता को नहीं हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अक्टूबर 2016 में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए कानून को पास कर दिया था, लेकिन अभी तक इससे खरीदारों की समस्या का समाधान होते हुए नहीं दिख रहा है।
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लग गया है शिकायतों का अंबार
घर खरीदने वालों को बिल्डरों से राहत नहीं मिलने के बाद इस कानून के लागू होने के बाद से लेकर अब तक 4300 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं लेकिन केवल 1200 केसों में आदेश दिया जा चुका है। इस वजह से घर खरीदारों में मायूसी छाई हुई है।
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एनसीआर से 60 फीसदी शिकायतें
दिल्ली से सटे गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सबसे ज्यादा फ्लैट बन रहे हैं। इन शहरों में घर खरीदने वालों को ही सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीन शहरों से ही यूपी रेरा के पास 60 फीसदी से ज्यादा शिकायतें पहुंची हैं।
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इस वजह से हैं दिक्कतें
मई 2017 में प्रदेश सरकार ने शहरी आवास व विकास विभाग के मुख्य सचिव को रेरा का अंतरिम चेयरपर्सन नियुक्त किया था। प्रदेश में योगी सरकार अभी तक किसी एक अधिकारी को पूर्णकालिक चेयरमैन भी नियुक्त नहीं कर पाई है। वहीं जिलों में भी इसके लिए समाधान अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो सकेगी है।
शिकायत करने के लिए जाना पड़ता है लखनऊ
फ्लैट खरीदारों को बिल्डरों की शिकायतों का समाधान करने के लिए लखनऊ जाना पड़ता है। वहीं स्टाफ न होने की वजह से ज्यादातर केसों को मुरादाबाद, आगरा या फिर मेरठ ट्रांसफर कर दिया जाता है।
शिकायत करने के लिए जाना पड़ता है लखनऊ
फ्लैट खरीदारों को बिल्डरों की शिकायतों का समाधान करने के लिए लखनऊ जाना पड़ता है। वहीं स्टाफ न होने की वजह से ज्यादातर केसों को मुरादाबाद, आगरा या फिर मेरठ ट्रांसफर कर दिया जाता है।