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जेपी ग्रुप ने एक साल में गंवा दिया बहुत कुछ, ऐसे बना 25 हजार करोड़ का देनदार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 10 Aug 2018 04:48 PM IST
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एक समय तक जयप्रकाश एसोसिएट (जेपी ग्रुप) की औद्योगिक कंपनियों में तूती बोलती थी। देश के पहले एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे से लेकर के एफ1 रेस का ट्रैक बनाने वाली कंपनी कब 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदार बन गई और दिवालिया घोषित होने की कगार पर आ गई। लेकिन यह सब कुछ एक पल में नहीं हुआ, इसकी कहानी 2017 में ही शुरू हो गई थी।
आरबीआई ने लिखा था पत्र
जून 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक ने कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन तब कंपनी के अधिकारियों ने इसे केंद्रीय बैंक की गलती मानते हुए सुधारने की बात कही थी। लेकिन 14 महीने में कंपनी के कई सारे कारोबार दूसरे हाथों में चले गए, जिनमें सीमेंट प्लांट, बिजली संयंत्र, गोल्फ कोर्स और एफ1 रेसिंग ट्रैक भी शामिल हैं।
हाइडिल पावर से शुरू हुई थी कंपनी
कंपनी ने सबसे पहले हिमाचल और उत्तराखंड में कई हाइडिल पावर संयंत्रों का निर्माण किया था, जिससे यह सुर्खियों में आई थी। इसके बाद कंपनी ने कई शहरों में होटल, ग्रेटर नोएडा में गोल्फ कोर्स, आगरा- ग्रेटर नोएडा के बीच यमुना एक्सप्रेसवे आदि भी शामिल हैं। कंपनी ने इसके अलावा कई शहरों में रियल इस्टेट प्रोजेक्ट भी शुरू किए, जिससे उसने करोड़ों रुपये व नाम भी कमाया था।
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आरबीआई ने लिखा था पत्र
जून 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक ने कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन तब कंपनी के अधिकारियों ने इसे केंद्रीय बैंक की गलती मानते हुए सुधारने की बात कही थी। लेकिन 14 महीने में कंपनी के कई सारे कारोबार दूसरे हाथों में चले गए, जिनमें सीमेंट प्लांट, बिजली संयंत्र, गोल्फ कोर्स और एफ1 रेसिंग ट्रैक भी शामिल हैं।
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हाइडिल पावर से शुरू हुई थी कंपनी
कंपनी ने सबसे पहले हिमाचल और उत्तराखंड में कई हाइडिल पावर संयंत्रों का निर्माण किया था, जिससे यह सुर्खियों में आई थी। इसके बाद कंपनी ने कई शहरों में होटल, ग्रेटर नोएडा में गोल्फ कोर्स, आगरा- ग्रेटर नोएडा के बीच यमुना एक्सप्रेसवे आदि भी शामिल हैं। कंपनी ने इसके अलावा कई शहरों में रियल इस्टेट प्रोजेक्ट भी शुरू किए, जिससे उसने करोड़ों रुपये व नाम भी कमाया था।
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एनसीएलटी से सुप्रीम कोर्ट और फिर वापसी
जेपी गोल्फ कोर्स, ग्रेटर नोएडा
फ्लैट खरीदारों की मानें तो वह जहां से चले थे फिर से वहीं पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के मामले को फिर से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में वापस कर दिया है। इससे वहां नए सिरे से सारी कवायद होगी।
जेपी के खरीदार एनएस ढ़ींगरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की आम्रपाली बिल्डर पर की गई कार्रवाई से हम बेहद उत्साहित थे, लेकिन हमारे मामले में केस को वापस एनसीएलटी भेज दिया गया। अब नोएडा के सभी 32000 फ्लैट खरीदारों को घरों से निकलना पड़ेगा।
फ्लैट खरीदारों की समस्या को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने जेपी इंफ्राटेक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए 750 करोड़ रुपये को एनसीएलटी में ट्रांसफर करने को कहा है।
इस रकम का क्या होगा, इसका फैसला एनसीएलटी करेगा। पीठ ने रिजर्व बैंक को जेपी एसोसिएट के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड’ में बदलाव करते हुए फ्लैट खरीदारों को भी क्रेडिटर में शामिल किया है।
लिहाजा कोर्ट ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर का पुनर्गठन कर इसमें फ्लैट खरीदारों को शामिल करने को कहा है। मालूम हो कि आईडीबीआई ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ 526 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के आरोप में एनसीएलटी में दिवालियापन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। जिसके बाद फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जेपी के खरीदार एनएस ढ़ींगरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की आम्रपाली बिल्डर पर की गई कार्रवाई से हम बेहद उत्साहित थे, लेकिन हमारे मामले में केस को वापस एनसीएलटी भेज दिया गया। अब नोएडा के सभी 32000 फ्लैट खरीदारों को घरों से निकलना पड़ेगा।
फ्लैट खरीदारों की समस्या को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने जेपी इंफ्राटेक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए 750 करोड़ रुपये को एनसीएलटी में ट्रांसफर करने को कहा है।
इस रकम का क्या होगा, इसका फैसला एनसीएलटी करेगा। पीठ ने रिजर्व बैंक को जेपी एसोसिएट के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड’ में बदलाव करते हुए फ्लैट खरीदारों को भी क्रेडिटर में शामिल किया है।
लिहाजा कोर्ट ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर का पुनर्गठन कर इसमें फ्लैट खरीदारों को शामिल करने को कहा है। मालूम हो कि आईडीबीआई ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ 526 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के आरोप में एनसीएलटी में दिवालियापन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। जिसके बाद फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।