2030 तक एक लाख करोड़ डॉलर का होगा रियल एस्टेट, मुंबई सबसे पसंदीदा निवेश स्थल
भारतीय रियल एस्टेट बाजार 2030 तक एक लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े को छू सकता है, जिसके साथ ही यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। हाल में किए गए एक सर्वेक्षण में यह संभावना जताई गई है।
केपीएमजी द्वारा नारेडको तथा एपीआरईए के सहयोग से किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, साल 2025 तक यह क्षेत्र बढ़कर 650 अरब डॉलर और 2028 तक 850 अरब डॉलर को पार करने साथ ही 2030 तक यह एक लाख करोड़ डॉलर का हो जाएगा।
गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2014 के बाद से ही वैश्विक रियल एस्टेट में अपनी रैंकिंग में निरंतर सुधार करता आ रहा है, जिससे निवेशकों में विश्वास पैदा हुआ है। रिपोर्ट के निष्कर्ष के बारे में बात करते हुए भारत में केपीएमजी के आसियान कॉरिडोर के पार्टनर व हेड नीरज बंसल ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र में यह वृद्धि किफायती आवास व को-वर्किंग स्थलों जैसी संपत्तियों की नई श्रेणी के उभरने से हुई है।
जीडीपी में योगदान 2025 तक होगा दोगुना
उन्होंने कहा कि इस वृद्धि के परिणामस्वरूप, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रियल एस्टेट क्षेत्र का योगदान औसत सालाना 6-7 फीसदी से बढ़कर 2025 में इसका दोगुना हो जाने की उम्मीद है। साथ ही, इससे 6.6 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-मार्च 2018 की अवधि में भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश साल दर साल के आधार पर 15 फीसदी की वृद्धि के साथ तीन अरब डॉलर पर पहुंच गया और 2026 तक इसके 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है। भविष्य में इसका सर्वाधिक फायदा टीयर 1 तथा टीयर 2 शहरों को होगा।
नियामकीय पहलों से हुआ सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय से भारतीय रियल्टी क्षेत्र भारी तादाद में अनबिके मकानों, खरीदारों के विश्वास में कमी, परियोजनाओं में विलंब तथा नकारात्मक नकद प्रवाह की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि पिछले दो वर्षों में घोषित विकास को बढ़ावा देने वाली कई नियामकीय गतिविधियों तथा पहल ने भविष्य में क्षेत्र की मजबूत वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि संस्थागत निवेशकों ने साल 2018 में अब तक चार अरब डॉलर का निवेश किया है और कुल सौदा 15 करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जो बीते पांच वर्षों में सर्वाधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में कुल सौदा तीन गुना बढ़कर 15.7 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि यह आंकड़ा साल 2016 में 4.7 करोड़ डॉलर था।
कुल 44 फीसदी विदेशी निवेश
साल 2018 में आए कुल निवेश में से लगभग 44 फीसदी विदेशी निवेशकों खासकर अमेरिका, कनाडा तथा सिंगापुर से आए। साथ ही, 90 फीसदी से अधिक विदेशी निवेश मुंबई, पुणे, बंगलूरू तथा हैदराबाद में किया गया।
अध्ययन के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने कुल 14.9 करोड़ डॉलर का सौदा किया, जबकि घरेलू निवेशकों ने 8.7 करोड़ डॉलर का सौदा किया। इन घरेलू निवेशकों ने वाणिज्यिक क्षेत्र में 95.9 करोड़ डॉलर तथा रिहायशी क्षेत्र में 87 करोड़ डॉलर की परियोजनाओं में निवेश किया।
कुल मिलाकर, मुंबई सबसे पसंदीदा निवेश स्थल बनकर उभरा, जहां कुल 53 फीसदी (दो अरब डॉलर) निवेश किया गया।