हाउसिंग सेक्टर को भी मिले उद्योग का दर्जा
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एनडीए सरकार ने अपने पहले बजट में सकारात्मक उम्मीदें जगाईं थीं। ऐसे में केन्द्रीय बजट में सुधार की उम्मीद की जा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रेष्ठ भारत के विजन की दिशा में समग्र उपाय किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
उम्मीद है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली निवेश में सुधार और वित्तीय घाटे को कम कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए समग्र योजना बनाएंगे। संक्षेप में, बजट में आगामी वर्षों के लिए नई सरकार के आर्थिक एजेंडे के ढांचे की पहली झलक दिखाई देगी।
किफायती आवास नीति समय की जरूरत है। इसके लिए सरकार टास्क फोर्स के सुझावों को लागू तो कर ही सकती है। सबसे पहले हाउसिंग को एक उद्योग का दर्जा दिया जाना चाहिए और किफायती आवास को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर रियायतों के साथ प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि यह गरीबों की जरूरतों को पूरा करता है।
रोजगार में भी है सहायक
इसके अलावा घर के खरीदारों एवं डेवलपर्स दोनों के लिए वित्तपोषण की लागत को कम करने की जरूरत है। कम समय में ब्याज दरों में 200 आधार अंकों यानी 2 फीसदी की कटौती जरूरी है।
सरकार को रीयल्टी के वित्त प्रतिबंधों को सहज बनाने हेतु कदम उठाना चाहिए। आरबीआई को हाउसिंग सेक्टर को सकारात्मक तौर पर देखना चाहिए और इस पर नकारात्मक भार नहीं डालना चाहिए।
इसका न सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान है, बल्कि इसके द्वारा अन्य आश्रित उद्योगों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए जा रहे हैं।