फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Property ›   Home buyers write to PM asking not to amend IBC

मकान खरीदारों ने आईबीसी में अधिकार घटाने के विरोध में पीएम मोदी से लगाई गुहार

Thu, 21 Nov 2019 04:40 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 21 Nov 2019 04:40 PM IST
विज्ञापन
Home buyers write to PM asking not to amend IBC
सांकेतिक तस्वीर

मकान खरीदारों ने आईबीसी में बदलाव के जरिये अधिकार सीमित किए जाने का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि मौजूदा कानून के तहत वित्तीय कर्जदाता का दर्जा मिला हुआ है, जिसे कानून में संशोधन कर कमजोर बनाने की तैयारी है। 

विज्ञापन


मकान खरीदारों के संगठन फोरम ऑफ पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (एफपीसीई) ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र में जारी सुधार के प्रयासों को विफल कर देगा। दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के मौजूदा प्रावधान में मकान खरीदारों को वित्तीय कर्जदाता का दर्जा मिला हुआ है। इससे एक व्यक्तिगत मकान खरीदार भी बिल्डर को दिवालिया कोर्ट में ले जा सकता है। इसका विरोध करते हुए दिल्ली-एनसीआर के डेवलपर्स ने सरकार से आईबीसी में बदलाव की मांग की थी। उनका कहना है उपभोक्ता की शिकायत पहले रेरा जैसे नियामक के पास सुनी जानी चाहिए, उसके बाद दिवालिया प्रक्रिया की शुरुआत की जाए। फोरम ने मकान खरीदारों का हित सुरक्षित बनाने के लिए प्रधानमंत्री से दखल देकर संशोधन प्रक्रिया रोकने की गुहार लगाई है। 

विज्ञापन

बिल्डर पर लगाए आरोप 

एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि बिल्डर मकान खरीदारों को सशक्त बनाने और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार लाने के सरकार के प्रयासों को विफल करने में लगे हैं। हम दिवालिया कानून में ऐसे किसी भी संशोधन का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी बिल्डर को अपने भले के लिए यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि पीड़ित मकान खरीदार उसके खिलाफ किस अदालत में शिकायत करता है। अगर बिल्डरों की मांग पर ऐसा कोई कदम उठाती है, तो इससे सुधार की ओर बढ़ रहे रियल एस्टेट क्षेत्र को झटका लगेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

कानून का दिया हवाला 

संगठन ने कहा कि आईबीसी के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, एक अकेला कर्जदाता (वित्तीय/परिचालन) जिसका बकाया 1 लाख रुपये से ज्यादा हो, वह किसी भी कॉरपोरेट कंपनी या संस्था को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में घसीट सकता है। ऐसे में एक अकेले मकान खरीदार को कैसे शिकायत करने से रोका जा सकता है, जिसकी बकाया राशि कानून में तय राशि से कहीं ज्यादा होती है। 

बिल्डर्स कर रहे ऐसी मांग

बिल्डर्स ने आईबीसी में संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि एक मकान खरीदार की शिकायत तब तक स्वीकार नहीं की जाए, जब तक वह अन्य पीड़ित खरीदारों का समूह नहीं बनाता है। इस पर एफपीसीई ने कहा कि इस तरह की मांग पूरी तरह नाजायज है, क्योंकि इसका मतलब यह है कि किसी हत्यारोपी के खिलाफ कोई व्यक्ति तब तक शिकायत नहीं कर सकता है, जब तक वह उसी आरोपी से पीड़ित अन्य व्यक्ति की तलाश नहीं कर लेता है। लिहाजा पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कानून के तहत मकान खरीदारों के अधिकारों को कमजोर नहीं होने देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed