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खुशखबरी: आवास विकास के फ्लैट होंगे 20 फीसदी सस्ते
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 22 Oct 2016 04:16 PM IST
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रियल एस्टेट कारोबार में मंदी से मुकाबले के लिए अब आवास विकास परिषद भी कूद पड़ा है। अपनी संपत्तियों के रेट 20 प्रतिशत तक कम करेगा। इसको लेकर परिषद ने आवासीय योजनाओं पर आने वाले खर्च में कटौती की है। जिसका सीधा फायदा आवंटी को मिलेगा।
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आवास विकास परिषद बोर्ड ने संपत्तियों की कीमत तय करने वाले नियमों में बदलाव कर दिया है। कास्टिंग के ये नियम आने वाली नई योजनाओं पर लागू होंगे। परिषद की मौजूदा योजनाओं में प्रदेश भर में करीब 10 हजार फ्लैट हैं, जो बिक नहीं पा रहे हैं। इसको देखते हुए अब परिषद कम कीमत के फ्लैट बनाने की तैयारी में है। इसके लिए भूमि अर्जन से लेकर विकास कार्य तक के खर्च में कमी की गई है ताकि संपत्ति की कीमत कम से कम रहे और लोग आसानी से खरीद सकें।
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आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि कास्टिंग के नियमों में बदलाव करने से संपत्तियों की कीमत करीब 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। बोर्ड में इसके लिए प्रस्ताव पास किया जाएगा। कास्टिंग के बदलाव से संपत्तियों की कीमतें कम होंगी लेकिन यह बदलाव नई संपत्तियों में ही लागू किए जाएंगे। जो योजनाएं चल रही हैं उनमें इसे पूरी तरह लागू कर पाना संभव नहीं है। मौजूदा योजनाओं में विकास कार्य पर आने वाले खर्च का नए सिरे से परीक्षण कर उसे कम किया जाएगा।
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ऐसे कम होगी कीमत
infra
1.ब्याज की गणना 10 प्रतिशत की जाएगी
आवास विकास संपत्तियों के निर्माण के लिए पहले हुडको से लोन लेता था उसको देखते हुए संपत्तियों की लागत में 16 प्रतिशत की दर से तीन साल का ब्याज
भी जोड़ा जाता था। अब ब्याज की दर कम हुई है और परिषद को लोन भी कम लेना पड़ता है। इसको देखते हुए अब लोन की स्थिति में ब्याज दर 10 प्रतिशत
की दर से ही संपत्ति की कीमत में जोड़ा जाएगा।
2.आधा होगा भूमि अर्जन व विकास व्यय पर सेंटेज
अभी परिषद भूमि अर्जन पर 12 प्रतिशत सेंटेज कीमत में जोड़ती है और इसी तरह विकास कार्य होने के बाद 12 प्रतिशत सेंटेज संपत्ति की कीमत में जोड़ती
है। इस तरह कुल 24 प्रतिशत सेंटेज संपत्ति की कीमत में जोड़ा जाता है। जिसे अब घटाकर अब आधा कर दिया गया है। अब अर्जन और विकास कार्य के बाद
छह-छह प्रतिशत ही सेंटेज लिया जाएगा।
3. बढ़ाया जाएगा विक्रय योग्य क्षेत्रफल
आवास विकास अब प्लाट नहीं दे रहा है। प्लाट के समय कुल भूमि के 50 प्रतिशत भूमि पर ही सिंगल स्टोरी मकान और प्लाट बनाए जाते थे। जबकि अब
मल्टीस्टोरी बनाई जा रही है। ऐसे में विकसित भूमि का क्षेत्रफल अब बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाएगा। जिससे दस प्रतिशत और जमीन का उपयोग परिषद
कर सकेगा।
4. 7.5 प्रतिशत जोड़ा जाएगा बैनामे का खर्च
अब तक परिषद किसी योजना के लिए जमीन लिए जाने पर बैनामा आदि का खर्च 10 प्रतिशत जोड़ता था। जिसे घटाकर अब 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
इससे अब तय की जाने वाली संपत्ति की कीमत में ढाई प्रतिशत की कमी आएगी।
5. कम किया जाएगा प्रति एकड़ विकास का खर्च
आवास विकास में अभी योजनाओं में जन सुविधाओं के विकास का खर्च करीब 76 लाख रुपये प्रति एकड़ आ रहा है। वहीं एलडीए में यह खर्च करीब 68 लाख
और निजी डेवलपर की योजनाओं में करीब 50 लाख रुपये है। इसको देखते हुए अब परिषद परीक्षण कर खर्च खटाएगा।
आवास विकास संपत्तियों के निर्माण के लिए पहले हुडको से लोन लेता था उसको देखते हुए संपत्तियों की लागत में 16 प्रतिशत की दर से तीन साल का ब्याज
भी जोड़ा जाता था। अब ब्याज की दर कम हुई है और परिषद को लोन भी कम लेना पड़ता है। इसको देखते हुए अब लोन की स्थिति में ब्याज दर 10 प्रतिशत
की दर से ही संपत्ति की कीमत में जोड़ा जाएगा।
2.आधा होगा भूमि अर्जन व विकास व्यय पर सेंटेज
अभी परिषद भूमि अर्जन पर 12 प्रतिशत सेंटेज कीमत में जोड़ती है और इसी तरह विकास कार्य होने के बाद 12 प्रतिशत सेंटेज संपत्ति की कीमत में जोड़ती
है। इस तरह कुल 24 प्रतिशत सेंटेज संपत्ति की कीमत में जोड़ा जाता है। जिसे अब घटाकर अब आधा कर दिया गया है। अब अर्जन और विकास कार्य के बाद
छह-छह प्रतिशत ही सेंटेज लिया जाएगा।
3. बढ़ाया जाएगा विक्रय योग्य क्षेत्रफल
आवास विकास अब प्लाट नहीं दे रहा है। प्लाट के समय कुल भूमि के 50 प्रतिशत भूमि पर ही सिंगल स्टोरी मकान और प्लाट बनाए जाते थे। जबकि अब
मल्टीस्टोरी बनाई जा रही है। ऐसे में विकसित भूमि का क्षेत्रफल अब बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाएगा। जिससे दस प्रतिशत और जमीन का उपयोग परिषद
कर सकेगा।
4. 7.5 प्रतिशत जोड़ा जाएगा बैनामे का खर्च
अब तक परिषद किसी योजना के लिए जमीन लिए जाने पर बैनामा आदि का खर्च 10 प्रतिशत जोड़ता था। जिसे घटाकर अब 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
इससे अब तय की जाने वाली संपत्ति की कीमत में ढाई प्रतिशत की कमी आएगी।
5. कम किया जाएगा प्रति एकड़ विकास का खर्च
आवास विकास में अभी योजनाओं में जन सुविधाओं के विकास का खर्च करीब 76 लाख रुपये प्रति एकड़ आ रहा है। वहीं एलडीए में यह खर्च करीब 68 लाख
और निजी डेवलपर की योजनाओं में करीब 50 लाख रुपये है। इसको देखते हुए अब परिषद परीक्षण कर खर्च खटाएगा।