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Budget 2021 in India: क्या होम लोन के ब्याज पर खत्म होगी आयकर छूट की सीमा? जानिए क्या है रियल एस्टेट क्षेत्र की उम्मीदें

Mon, 01 Feb 2021 08:03 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Mon, 01 Feb 2021 08:03 AM IST
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Budget 2021 in India: Home Loan Interest Budget 2021 know what real estate sector expects from Finance Minister Nirmala Sitharaman
बजट 2021: रियल एस्टेट क्षेत्र की बजट 2021 से उम्मीदें - फोटो : pixabay

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह 11 बजे केंद्रीय बजट पेश करेंगी। कोरोना वायरस महामारी के समय में रियल एस्टेट क्षेत्र को झटका लगा है और मकानों की खरीद में आई कमी को देखते हुए सरकार इस क्षेत्र को कई राहत दे सकती है। यह क्षेत्र 14 फीसदी रोजगार प्रदान करने के साथ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सात फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में कंफेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई), नारेडको, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और एसोचैम जैसे संगठनों ने प्रोत्साहन एवं समर्थन देने के लिए बजट-2021 के लिए अपने सुझाव दिए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-

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आवास ऋण के भुगतान पर कर छूट की सीमा बढ़ाने की उम्मीद
रियल्टी कंपनियों के संगठन क्रेडाई ने घर की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकार से आगामी बजट में कर छूट का दायरा बढ़ाने की मांग की है। इसके साथ ही संगठन ने सुझाव दिया कि आवास ऋण के भुगतान पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत मिलने वाली कर छूट की सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए। संगठन ने रियल एस्टेट निवेश न्यास (रीट) में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कर प्रोत्साहन की भी सिफारिश की। तरलता सुनिश्चित करने के लिए कोषों तक पहुंच तथा पुनर्भुगतान की लंबी अवधि से डेवलपरों को मदद मिल सकती है। 
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विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के कदम उठाने की जरूरत
संगठन ने मांग को बढ़ावा देने के लिए सस्ते आवास ऋण तथा आवास क्षेत्र में निवेश पर कर छूट का भी प्रस्ताव दिया। उसने कहा, 'किफायती आवास, संयुक्त विकास को लेकर कराधान में सुधार तथा विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के कदम अभी के समय की जरूरत हैं।'

खत्म हो लोन के ब्याज पर आयकर छूट की सीमा 
उद्योग संगठनों की ओर से मांग की गई है कि 30 लाख रुपये या उससे कम के किफायती घरों पर उसकी कीमत का 90 फीसदी तक होम लोन दिया जाए। होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट की सालाना दो लाख की सीमा को पूरी तरह खत्म किया जाए या फिर इसे नए स्तर पर ले जाया जाए।

सीजीएसटी अधिनियम में संशोधन की मांग
सीआईआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए दिए गए सुझाव में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 16 और धारा 17(5) में संशोधन करने की मांग की, ताकि रियल एस्टेट कंपनियां निर्माण के दौरान वस्तुओं व सेवाओं की खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठा सकें। 

आईटीसी नहीं मिलने से अटकती है डेवलपर्स की पूंजी 
संगठन ने कहा कि आईटीसी नहीं मिलने से रियल एस्टेट डेवलपर्स की पूंजी अटकती है। सीआईआई ने कहा कि, 'संपत्तियों को व्यावसायिक किराए पर देने या मॉल में आउटलेट पट्टे पर देने में किराए पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। निर्माण के दौरान आईटीसी नहीं मिलने से निर्माण की लागत बढ़ती है और कार्यशील पूंजी का नुकसान होता है। इसका असर पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर होता है।' 

50 फीसदी तक हो किराया आय पर कर कटौती 
नारेडको ने आगामी बजट में रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सस्ते घरों के लिए मूल्य के 90 फीसदी तक कर्ज की सुविधा देने और किराए के मकानों के प्रोत्साहन के लिए किराया आय पर कर कटौती 50 फीसदी तक रखने जैसे कई सुझाव सरकार को दिए। संगठन ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के क्षेत्र में सुधार और समग्र विस्तार की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि इसमें रियल एस्टेट क्षेत्र को विदेशी वाणिज्यक कर्ज लेने की छूट दी जाए। रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक किराए की आय पर (रखरखाव के उद्देश्य से खर्च) की कटौती की दर को 30 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाना चाहिए। 

90 फीसदी तक किया जाए एलटीवी
नारेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने वीडियो कांफ्रेस के जरिए कहा कि, 'कोविड-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है और भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है।' नारेडको की सिफारिश है कि 30 लाख रुपये या उससे कम के सस्ते घरों के लिए उनके कर्ज का मूल्य के साथ अनुपात (एलटीवी) बढ़ाकर 90 फीसदी तक किया जाए और इसी सुविधा का एमआईजी और एचआईजी तक भी विस्तार किया जाए। 

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