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बजट 2019: रियल एस्टेट सेक्टर में हो रहे हैं सुधार, लोन हो सस्ता तो बनेगी बात

Sat, 19 Jan 2019 07:16 PM IST
गौरव द्विवेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sat, 19 Jan 2019 07:16 PM IST
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budget 2019 expectation from real estate sector home loan should become cheaper
- फोटो : amar ujala

2022 तक सभी के लिए आवास का प्रधानमंत्री जी का दृष्टिकोण अब अपने पूरे ज़ोर पर है, सब की निगाहें आने वाले सालों में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पर टिकी हैं। संविधान में महत्वपूर्ण बदलावों जैसे जीएसटी और नोटबंदी के बाद अब रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। 

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अब तक रियल एस्टेट सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में पिछले चाल सालों की तुलना में अधिकतम 8.2 फीसदी विकास के बाद दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की दर गिर कर 7.1 फीसदी हो गई।
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इसी बीच रियल एस्टेट सेक्टर ने 2017 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 6-7 फीसदी का योगदान दिया, जिसके 2025 तक 13 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। 2030 तक भारतीय रियल एस्टेट उद्योग के 1 ट्रिलियान अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके साथ भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। 
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रियल एस्टेट सेक्टर कृषि और निर्माण के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा नियोक्ता भी है और वर्तमान में 50 मिलियन लोगों को रोज़गार दे रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के अनुसार 2022 तक रियल एस्टेट एवं निर्माण उद्योग में 66 मिलियन से अधिक लोगों की मांग होगी, वहीं केपीएमजी के अनुमान के मुताबिक 2022 तक यह आंकड़ा 75 मिलियन को पार कर जाएगा। 

उम्मीद की जा रही है कि बड़े नीतिगत बदलावों जैसे रेरा अधिनियम 2016 और जीएसटी के बाद 2019 में रियल एस्टेट में सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे, इन बदलावों के चलते 2018 में घरों की बिक्री और नई परियोजनाओं के लांच की दर कम हो गई थी। हालांकि नॉन -बैंकिंग फाइनेन्शियल कंपनियों के साथ लिक्विडिटी का मुद्दा सेक्टर के लिए अभी भी बड़ी समस्या बना हुआ है और उम्मीद है कि 2019 के अंत तक सेक्टर इस चुनौती से भी उबरने लगेगा। 
 
एक अनुमान के मुताबिक सेक्टर 2025 तक 650 बिलियन ड डॉलर तक और 2028 तक 850 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। भारत ने 2018 में ग्लोबल रियल एस्टेट में अपनी रैंकिंग में लगातार सुधार किया है, जिसके चलते भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।  

2012 में निर्माणाधीन संपत्तियों पर निवेश 174 बिलियन डॉलर था जो  2018  में बढ़कर 243 बिलियन डॉलर हो गया है। रेजीडेंशियल, कमर्शियल और रीटेल तीन मुख्य सम्पत्ति वर्ग हैं, जो सेक्टर के विकास में प्राथमिक रूप से योगदान दे रहे हैं। 

रिहायशी सेगमेन्ट देश में रियल एस्टेट के समग्र विकास में लगभग 80 फीसदी योगदान देता है। साल 2018 इस सेगमेन्ट के लिए मिला-जुला साल रहा, जहां एक ओर नीतिगत बदलावों के चलते अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा मिलने से सेगमेन्ट में सुधार हुआ, नए लांच और बिक्री की दर बढ़ी।

वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता आज भी रिहायशी सम्पत्ति में निवेश करते हुए पूरी सावधानी बरत रहे हैं। लाइफस्टाइल और प्रीमियम हाउसिंग की चाल अभी सुस्त बनी हुई है, हालांकि अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेन्ट ज़ोर पकड़ रहा है। 2017 और 2018 में रु 4 मिलियन की रेंज में सबसे ज्यादा लांच हुए। 


ऐसे में अंतरिम बजट सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनावों से ठीक पहले इसमें बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में होंगे। 

(आर के अरोड़ा, चैयरमेन, सुपरटेक लिमिटेड)

नोट--यह लेखक के अपने निजी विचार हैं।

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