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रियल इस्टेट की रियलिटीः 220 प्रोजेक्ट में अटके 1.74 लाख घर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 24 Jul 2019 08:43 PM IST
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1.74 lakh flats stalled in 220 projects in seven major region of india
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को आम्रपाली केस में दिए गए फैसले के बाद अब कई लोगों में उम्मीद जगी है, कि उनको भी वर्षों से लंबित पड़े प्रोजेक्ट में घर मिल सकते हैं। अभी रियल इस्टेट का बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा है। जहां डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट नहीं लेकर के आ रहे हैं, वहीं 2013 में शुरू हुए पुराने प्रोजेक्ट भी पूरे नहीं हुए हैं। देश के टॉप सात रीजन में फिलहाल ऐसे 220 प्रोजेक्ट हैं, जोकि अभी भी पूरी तरह से बने नहीं हैं। इन प्रोजेक्ट के न बनने से 1.74 लाख लोगों को अभी भी अपने सपनों का आशियाना नहीं मिला है। 

दिल्ली-एनसीआर का हाल सबसे बुरा

संपत्ति सलाहकार कंपनी एनारॉक के मुताबिक, इन सात रीजन में दिल्ली-एनसीआर लिस्ट में पहले स्थान पर है। यहां पर करीब 67 प्रोजेक्ट में 1.18 लाख फ्लैट अटके हुए हैं। यह कुल फ्लैटों का 68 फीसदी है। इन प्रोजेक्ट की कुल लागत 82,200 करोड़ रुपये है। एनसीआर में जितने प्रोजेक्ट लटके हुए हैं, उनमें करीब 98 फीसदी केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हैं। बाकी के दो फीसदी गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद में स्थित हैं। 

दूसरे नंबर पर एमएमआर

एनसीआर के बाद दूसरे स्थान पर मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन (एमएमआर) है। यहां पर कुल 38,060 फ्लैटों का निर्माण 89 प्रोजेक्ट में अधूरा पड़ा हुआ है। इन फ्लैट्स का कुल मूल्य 80,200 करोड़ रुपये है। 

अन्य शहरों में यह है स्थिति

पुणे में करीब 9,650 फ्लैटों का निर्माण 28 प्रोजेक्ट में अटका हुआ है। इनका कुल मूल्य सात हजार करोड़ रुपये है। हैदराबाद में 4150 फ्लैट का निर्माण अटका है, जिनका कुल मूल्य 3600 करोड़ रुपये है। वहीं बंगलूरू में 3870 फ्लैट अटके पड़े हैं, जिनका कुल मूल्य 4200 करोड़ रुपये है। 
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