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कहां हैं सस्ते मकान, जिनके लिए कोई कर्ज ले
नई दिल्ली/अजीत सिंह
Updated Mon, 12 Nov 2012 08:29 PM IST
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अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने की कोशिशें महंगे मकानों के सामने धराशाई हो रही हैं। सरकार प्राथमिकता क्षेत्र के तहत सस्ते मकानों के होम लोन पर ब्याज में छूट देती है। इसके बावजूद कुल होम लोन में पांच लाख रुपये तक के कर्ज की हिस्सेदारी तेजी से घटी है। यानी आम आदमी को घर के लिए सस्ता कर्ज तो मिल रहा है लेकिन सस्ते मकान उपलब्ध नहीं है।
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केंद्रीय आवास एवं शहरी उन्मूलन मंत्रालय के सचिव अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि कुल होम लोन में बढ़ोतरी के बावजूद पांच लाख रुपये तक के होम लोन की हिस्सेदारी घटी है। वर्ष 2009-10 में बैंक व हाउसिंग फाईनेंस कंपनियों के कुल हाउसिंग लोन में पांच लाख रुपये तक के होम लोन की हिस्सेदारी 23.2 फीसदी थी जो वर्ष 2011-12 में घटकर सिर्फ 13.6 रह गई है। दो साल पहले सरकारी बैंक कुल हाउसिंग लोन का करीब 26 फीसदी सस्ते मकानों के लिए देते थे, वे भी अब इस मद में सिर्फ 16.6 फीसदी कर्ज दे रहे हैं।
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मिश्रा का कहना है कि सस्ते मकानों के लिए होम लोन में कमी चिंता का विषय है। इस श्रेणी के होम लोन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने बैंकों व हाउसिंग फाईनेंस कंपनियों के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी योजना शुरू की गई है। उम्मीद की जा रही है कि इससे पांच लाख रुपये तक के होम लोन की तरफ बैंकों का रुझान बढ़ेगा।
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केंद्रीय आवास मंत्रालय पिछले कई वर्षों से प्राइवेट हाउसिंग योजनाओं में निम्न आय वर्ग और आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों की हिस्सेदारी तय कराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अभी तक इसका खास असर नहीं दिखा है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कुशमैन एंड वेकफिल्ड की एक हालिया रिपोर्ट का कहना है कि इस साल लांच हुए अधिकांश नए प्रोजेक्ट्स का जोर ज्यादा आमदनी वाले ग्राहकों (एचएनआई) पर रहा है जबकि सबसे ज्यादा मांग सस्ते मकानों की है। इस फर्क के वजह से प्रॉपर्टी की मांग व आपूर्ति में अंतर बढ़ा है।