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हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे हैं तो पहले जान लें ये 7 बातें

Mon, 18 Mar 2013 08:54 AM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क Updated Mon, 18 Mar 2013 08:54 AM IST
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these eight points know about health insurance

देश में हेल्थ इंश्योरेंस को मेडीक्लेम के रूप में भी जानते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस बीमारी या दुर्घटना में घायल होने पर मेडिकल देखभाल में आए खर्च को कवर करता है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण वित्तीय उत्पाद है, जिसे हर व्यक्ति को अपनी उम्र के अनुसार जरूर लेना चाहिए।

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इसके जरिए आप बेहतर उपचार बिना उस पर आने वाले खर्च की चिंता के प्राप्त कर सकते हैं। यह हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है कि उसमें पॉलिसीधारक को पूरा मेडिकल खर्च का कवर मिलेगा या फिर वह दवा, उपचार, डॉक्टर का परामर्श शुल्क, बीमारी या चोट के उपचार आदि के खर्च का ही दावा कर पाएगा।
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कैसे काम करता है हेल्थ इंश्योरेंस?
हेल्थ इंश्योरेंस के लिए कंपनी को सालाना शुल्क यानी प्रीमियम का भुगतान करना होता है। प्रीमियम कवर की रकम के अनुसार तय होता है। मान लीजिए, आपने एक साल के लिए 5 लाख रुपये का कवर लिया।
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वर्ष के दौरान यदि आप बीमार या दुर्घटना में घायल होते हैं, तो बीमा कंपनी से 5 लाख रुपये का मेडिकल खर्च प्राप्त कर सकते हैं। यह क्लेम वर्ष के दौरान एक या कई बार में किया जा सकता है।

पॉलिसी में क्या-क्या होता है कवर
पॉलिसी कवर को लेकर अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग प्रावधान है। आमतौर पर कवर में इन-पेशेंट ट्रीटमेंट, प्री-हॉस्पिटलाइजेशन, पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन, डे-केयर उपचार, घर पर हुए उपचार, आपातकालीन एम्बुलेंस (अधिकतम 2,000 रुपये तक) और आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक पद्धति (वैकल्पिक उपचार प्रणाली के तहत बढ़ती लोकप्रियता के कारण) के तहत हुए उपचार पर हुआ खर्च शामिल होता है।

बीमा कंपनी इस तरह करती है भुगतान
बीमा कंपनियां मेडीक्लेम का भुगतान दो तरह से रीइम्बर्समेंट और कैशलेस सेटलमेंट के जरिए करती हैं। रिइम्बर्समेंट व्यवस्था के अंतर्गत पॉलिसीधारक को पहले पूरा भुगतान करना पड़ता है और बाद में वह कंपनी को क्लेम फाइल कर भुगतान प्राप्त करता है।

कैशलेस सेटलमेंट के तहत, बीमा कंपनी से संबद्ध जिस अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है, कंपनी उसे उपचार पर आए खर्च का भुगतान करती है।

पॉलिसी रिन्यूअल में ग्रेस पीरियड
प्रत्येक पॉलिसी में रिन्यूअल के लिए 14 से 15 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है। सीधे शब्दों में समझा जाए तो ग्रेस पीरियड से मतलब यह है कि आप बिना किसी परेशानी के अपनी पॉलिसी को रिन्यूअल की वास्तविक तारीख के 15 दिनों बात तक रिन्यू करा सकते हैं।

कई कंपनियां किसी खास बीमारी की स्थिति में अस्पताल के कमरे के किराए, डॉक्टर की फीस व अधिकांश भुगतान पर कैपिंग देती हैं। तय सीमा से अधिक खर्च होने पर यह कैपिंग कैशलेस सुविधाएं देने से इनकार कर देती है।

जान लें को-पेमेंट की शर्त
को-पेमेंट वह शर्त है, जिसमें आपको किसी विशेष उपचार के लिए हॉस्पिटेलाइजेशन में आने वाले कुल खर्च के एक निश्चित प्रतिशत का भुगतान करना होता है। यह शर्त महज वरिष्ठ नागरिकों की पॉलिसियों पर ही लागू होती है।

कवर न होने वाली बीमारियां
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में खास बीमारी के लिए अस्थायी या कुछ वर्षों के लिए निश्चित छूट होती हैं। कंपनी के एजेंट या कंपनी की वेबसाइट से यह मालूम हो सकता है कि पॉलिसी में कौन सी बीमारियां कवर होती हैं और किन पर निश्चित छूट की व्यवस्था है।


क्लेम की प्रक्रिया जानना जरूरी
कैशलेस सुविधा पाने के लिए अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटों के भीतर कंपनी को सूचित करना जरूरी होता है। क्लेम प्रक्रिया की जानकारी पॉलिसीधारक के परिवार के सदस्यों को भी होनी चाहिए। कागजात ऐसी जगह पर रखे हों, जहां परिवार के सदस्य आसानी से पहुंच सके।

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