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बच्चों को सिखाएं पैसे का प्रबंधन
नई दिल्ली
Updated Mon, 04 Feb 2013 03:16 PM IST
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बच्चों को मनी मैनेजमेंट (पैसे का प्रबंधन) का सबक सिखाने में माता-पिता का अहम रोल होता है। अगर बच्चों को शुरुआत से पैसे की अहमियत के बारे में समझाया जाए, तो उन्हें अपनी वित्तीय योजनाएं तैयार करने में कोई परेशानी नहीं होती है।
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वहीं, अगर माता-पिता ने बच्चों को मनी मैनेजमेंट के गुर नहीं सिखाए, तो उन्हें कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। आमतौर पर ऐसी परेशानी तब खड़ी होती हैं, जब बच्चों को जेब खर्च मिलता है या वह अपनी नौकरी की शुरुआत करता है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड के ऑफर उनके ई-मेल पर आने लगते हैं और पैसे की किल्लत पड़ने पर उन्हें मजबूरी में ये ऑफर स्वीकार करने पड़ते हैं। ऐसे में बच्चों को कर्ज के जाल से बचाने के लिए मनी मैनेजमेंट सीखना जरूरी है और यह बेहद आसान भी है।
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जब बच्चे इतने बड़े हो जाएं कि वह पैसों को गिन लें, तो आप उन्हें करेंसी के बारे में बताएं। उनकी दिलचस्पी पैसों के जोड़-घटाव में पैदा करें। बच्चों को उदाहरण के जरिए पैसे का प्रबंधन समझाएं। उन्हें बचत, निवेश, खर्च घटाने और कर्ज कम करने की जानकारी दें। आप बच्चों को यह सारी जानकारी सही तरीके से दें, इसके लिए जरूरी है कि आपको भी चीजें मालूम हों। अगर आपको किसी बात को लेकर संशय हो, तो पहले उसे क्लीयर कर लें, तब ही बच्चों को बताएं। आप बच्चों को जेब खर्च के लिए मासिक या हफ्ते के आधार पर जो पैसा देते हैं, उसको खर्च करने से जुड़े फैसले उन्हें ही लेने दें।
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हालांकि, पैसे देने की एक सीमा तय कर दें, उन्हें उससे ज्यादा पैसे न दें। पैसे की सीमा उनकी उम्र और जरूरतों के आधार पर तय करें। कई माता-पिता अपने बच्चों को कभी पैसे नहीं देते हैं, इसका सबसे बड़ा खामियाजा यह होता है कि उनके बच्चे यह नहीं सीख पाते हैं कि पैसे को कैसे मैनेज करें। बच्चों को एक बार में एक ही चीज सिखाएं। अगर आप एक दिन में ही उसे कई चीजें बताएंगे, तो वह कन्फ्यूज हो जाएगा। हम एक दिन में उनसे अपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि वह बेहतरीन मनी मैनेजर बन जाएंगे। इसमें वक्त लगता है और उन्हें पर्याप्त समय दीजिए।
उदाहरण के तौर पर आप बच्चों को एक महीने में पैसे की बजटिंग के बारे में बताएं। अगले महीने में बचत खाते की जानकारी दें। अगर आप क्रमश: उन्हें इस बारे में बताएंगे, तो वह सारी बातें आसानी से समझ लेंगे। बच्चों को कर्ज से जुड़ा सबक देना बेहद जरूरी होता है। हम अगर किसी चीज को लेकर आतुर हो जाते हैं, तो तत्काल आधार पर उसे खरीदना चाहते हैं, भले ही हमारे पास उसके लिए पर्याप्त पैसे न हों। ऐसे में लोग क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि हम जो पैसा उधार लेते हैं, उसे लौटाना पड़ता है और उस पर बैंक ऊंची दरों पर ब्याज लेते हैं।
बच्चों को बचत खातों और उस पर मिलने वाली ब्याज की जानकारी देना भी अहम होता है। बच्चों को यह भी समझाएं कि कर्ज उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। बच्चों को मिलने वाले जेब खर्च का बजट तैयार करवाने में उनकी मदद करें। बच्चे से कहें कि वह एक खाका तैयार करें कि कितना पैसा वह किस चीज पर खर्च करेंगे। इस आदत से उन्हें भविष्य में अपने पैसे को मैनेज करने में मदद मिलेगी। एक अहम बात ध्यान रखें कि अगर इस दौरान आपका बच्चा किसी वित्तीय संकट में फंसता है, तो पैसे देकर उसकी मदद न करें। अगर आपने ऐसा किया तो यह आपकी सारी मेहनत बर्बाद कर देगा।