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रिटायरमेंट प्लानिंग जितनी जल्दी करें, उतना ही अच्छा
कारोबार डेस्क
Updated Mon, 01 Oct 2012 09:11 AM IST
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रिटायरमेंट की प्लानिंग हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं हो सकती है। व्यक्ति की उम्र, आमदनी, जीवनशैली, निवेश की क्षमता आदि के आधार पर यह तय होता है कि किसे कहां और कितना निवेश करना चाहिए। रिटायरमेंट की प्लानिंग में पैसे के साथ ही इस बात के लिए भी जोर देना चाहिए कि बुढ़ापे में आपके जीवन के सुकून के पल कैसे बीतने वाले हैं। रिटायरमेंट फंड का कारोबारी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
रिटायरमेंट प्लानिंग के कुछ गैर आर्थिक पक्ष
आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ इस बात की भी योजना बना लें कि आपका समय कैसे बीते। एकल परिवार के समाज में खुद को व्यस्त और खुश रहने के तरीके भी तय करने होंगे, जिससे कि मनोवैज्ञानिक परेशानी होने से बच सकें।
--अगर आपमें सामाजिक कार्य करने का जज्बा है, तो इस बारे में सोचें
--कमाऊ जीवन की आपाधापी में अपने अधूरे पड़े शौक को पूरा करें
--अपनी अभिरुचि और योजना के अनुसार घूमने का शौक पूरा करें
--रिटायरमेंट से कई साल पहले से ही अपना स्वास्थ्य बीमा करा लें
--रिटायरमेंट के बाद हेल्थ बीमा पर पुरानी बीमारियों के कवरेज में दिक्कत आती है
--संपत्ति के बंटवारे के लिए वसीयत का रास्ता अपनाएं न कि जीवन काल में ही बंटवारा कर देना
--रिटायरमेंट फंड से नया कारोबार शुरू करने से हमेशा बचना चाहिए, इसमें बड़े खतरे हैं
--रिटायरमेंट प्लानिंग सही नहीं हो तो आप इन सुनहरे पलों को ठीक से जी नहीं पाएंगे। रिटायरमेंट बाद की जिंदगी उत्साहपूर्ण व शांतिपूर्ण होनी चाहिए।
जोखिम व आमदनी के हिसाब से ही चुनें निवेश का विकल्प
इक्विटी: परंपरागत रूप से यह सेवानिवृत्ति प्लान के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते, लेकिन अगर आप जल्दी शुरू करते हैं तो यह आपके निवेशों को उछाल दे सकते हैं।
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बीमा: यह सेवानिवृत्ति योजना के लिए प्रयोग होने वाला एक उपयुक्त साधन है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इसे केवल जोखिम सुरक्षा के रूप में प्रयोग करना चाहिए, न कि एक निवेश माध्यम के रूप में।
प्रोविडेंट फंड व सरकारी फंड: सदाबहार पसंदीदा विकल्पों में से एक, हमारे बड़े-बूढे़ हमेशा से इन कम जोखिम वाली योजना में विश्वास रखते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट: सुरक्षित व विश्वसनीय लेकिन मुद्रास्फीति के समय में यह कम रिटर्न देते हैं।
म्यूचुअल फंड: ये विकल्प अक्सर सुझाए जाते हैं। इसमें पेशेवरों का अनुभव और विशेषज्ञता साथ में मिलती है।
प्रॉपर्टी: लंबी अवधि के लिए पूर्णतया प्रोत्साहित किया गया ऐसेट है। खासकर रीयल एस्टेट में उछाल के बाद, लेकिन सबके पास इसमें निवेश करने के लिए धन नहीं होता।
पेंशन प्लान: यह सेवानिवृत्ति के लिए आदर्श हैं। क्योंकि, यह आपके पोर्टफोलियो को ऋण योजनाओं का सहारा उपलब्ध कराते हैं और आपके पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करते हैं। इसमें कर छूट का लाभ भी मिलता है। सेवानिवृत्ति के बाद अपने फंड मूल्य में से एक तिहाई तक राशि निकाल सकते हैं वो भी करमुक्त। आपका बचा हुआ धन एन्यूटी प्लान में निवेश किया जाएगा। इसमें से आप मासिक या त्रैमासिक आमदनी पाने के लिए विकल्प चुन सकते हैं।
यूनिट लिंक्ड पेंशन योजना: अगर आप थोड़े से जोखिम को उठा सकते हैं और अपनी पॉलिसी की नियमित जांच कर सकते हैं तो यूलिप निवेश का एक अच्छा विकल्प है। आप अपने फंड को प्रभावशाली इक्विटी योजना में निवेश कर सकते हैं। अपने फंड को जैसे और जब जरूरत हो, अलग-अलग योजनाओं में ले जा सकते हैं। ऋण से इक्विटी या किसी अन्य में।
ऋण उत्पाद, बांड, डिबेंचर, राष्ट्रीय बचत पत्र आदि: यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने धन को कैसे निवेश करना चाहते हैं और कितना जोखिम उठा सकते हैं।
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रिटायरमेंट प्लानिंग के कुछ गैर आर्थिक पक्ष
आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ इस बात की भी योजना बना लें कि आपका समय कैसे बीते। एकल परिवार के समाज में खुद को व्यस्त और खुश रहने के तरीके भी तय करने होंगे, जिससे कि मनोवैज्ञानिक परेशानी होने से बच सकें।
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--अगर आपमें सामाजिक कार्य करने का जज्बा है, तो इस बारे में सोचें
--कमाऊ जीवन की आपाधापी में अपने अधूरे पड़े शौक को पूरा करें
--अपनी अभिरुचि और योजना के अनुसार घूमने का शौक पूरा करें
--रिटायरमेंट से कई साल पहले से ही अपना स्वास्थ्य बीमा करा लें
--रिटायरमेंट के बाद हेल्थ बीमा पर पुरानी बीमारियों के कवरेज में दिक्कत आती है
--संपत्ति के बंटवारे के लिए वसीयत का रास्ता अपनाएं न कि जीवन काल में ही बंटवारा कर देना
--रिटायरमेंट फंड से नया कारोबार शुरू करने से हमेशा बचना चाहिए, इसमें बड़े खतरे हैं
--रिटायरमेंट प्लानिंग सही नहीं हो तो आप इन सुनहरे पलों को ठीक से जी नहीं पाएंगे। रिटायरमेंट बाद की जिंदगी उत्साहपूर्ण व शांतिपूर्ण होनी चाहिए।
जोखिम व आमदनी के हिसाब से ही चुनें निवेश का विकल्प
इक्विटी: परंपरागत रूप से यह सेवानिवृत्ति प्लान के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते, लेकिन अगर आप जल्दी शुरू करते हैं तो यह आपके निवेशों को उछाल दे सकते हैं।
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बीमा: यह सेवानिवृत्ति योजना के लिए प्रयोग होने वाला एक उपयुक्त साधन है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इसे केवल जोखिम सुरक्षा के रूप में प्रयोग करना चाहिए, न कि एक निवेश माध्यम के रूप में।
प्रोविडेंट फंड व सरकारी फंड: सदाबहार पसंदीदा विकल्पों में से एक, हमारे बड़े-बूढे़ हमेशा से इन कम जोखिम वाली योजना में विश्वास रखते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट: सुरक्षित व विश्वसनीय लेकिन मुद्रास्फीति के समय में यह कम रिटर्न देते हैं।
म्यूचुअल फंड: ये विकल्प अक्सर सुझाए जाते हैं। इसमें पेशेवरों का अनुभव और विशेषज्ञता साथ में मिलती है।
प्रॉपर्टी: लंबी अवधि के लिए पूर्णतया प्रोत्साहित किया गया ऐसेट है। खासकर रीयल एस्टेट में उछाल के बाद, लेकिन सबके पास इसमें निवेश करने के लिए धन नहीं होता।
पेंशन प्लान: यह सेवानिवृत्ति के लिए आदर्श हैं। क्योंकि, यह आपके पोर्टफोलियो को ऋण योजनाओं का सहारा उपलब्ध कराते हैं और आपके पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करते हैं। इसमें कर छूट का लाभ भी मिलता है। सेवानिवृत्ति के बाद अपने फंड मूल्य में से एक तिहाई तक राशि निकाल सकते हैं वो भी करमुक्त। आपका बचा हुआ धन एन्यूटी प्लान में निवेश किया जाएगा। इसमें से आप मासिक या त्रैमासिक आमदनी पाने के लिए विकल्प चुन सकते हैं।
यूनिट लिंक्ड पेंशन योजना: अगर आप थोड़े से जोखिम को उठा सकते हैं और अपनी पॉलिसी की नियमित जांच कर सकते हैं तो यूलिप निवेश का एक अच्छा विकल्प है। आप अपने फंड को प्रभावशाली इक्विटी योजना में निवेश कर सकते हैं। अपने फंड को जैसे और जब जरूरत हो, अलग-अलग योजनाओं में ले जा सकते हैं। ऋण से इक्विटी या किसी अन्य में।
ऋण उत्पाद, बांड, डिबेंचर, राष्ट्रीय बचत पत्र आदि: यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने धन को कैसे निवेश करना चाहते हैं और कितना जोखिम उठा सकते हैं।