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Hindi News ›   Business ›   Personal Finance ›   No decision on cash transaction tax over 50000: Das

कैश ट्रांजेक्शन पर टैक्स लगाने को लेकर नहीं हुआ कोई फैसला: शक्तिकांत

Thu, 09 Feb 2017 07:18 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 09 Feb 2017 07:18 PM IST
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No decision on cash transaction tax over 50000: Das
- फोटो : ani

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि 50,000 रुपये अथवा इससे अधिक नकद लेन-देन करने पर बैंकिंग नकद लेनदेन कर (बीसीटीटी) लगाने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति ने नकद लेन-देन की सीमा तय करने और एक सीमा से अधिक नकद लेन-देन पर कर लगाने की सिफारिश की है। साथ ही दास ने अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दर सात प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद जताई है।शक्तिकांत दास ने कहा कि इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं किया गया है। एसोसिएटिड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए दास ने कहा, कुछ सुझाव आए हैं।
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सरकार ने मुख्यमंत्रियों की समिति के सुझाव पर कोई निर्णय नहीं लिया है। सरकार रिपोर्ट का सावधानीपूर्वक अध्ययन करेगी और उचित फैसला लेगी। गौरतलब है कि डिजिटलीकरण पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में गठित मुख्यमंत्रियों की समिति ने नकद में होने वाले सभी तरह के बड़े लेन-देन में नकदी के इस्तेमाल की सीमा तय करने और 50,000 रुपये से अधिक के नकद लेन-देन पर शुल्क लगाने की सिफारिश की है। 

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'राजकोषीय परेशानियों के चलते कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती आसान नहीं'

No decision on cash transaction tax over 50000: Das
शक्तिकांत दास - फोटो : ANI

कॉर्पोरेट कर की दरों में कमी की योजना पर उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट कर की दर में एक झटके में कमी नहीं की जा सकती है यह काम चरणबद्ध तरीके से होगा, क्योंकि इसके साथ कई मसले जुड़े हैं।

दास ने कहा, दो साल पहले वित्तमंत्री ने घोषणा की थी कि कॉर्पोरेट कर दरों को कम किया जायेगा, लेकिन सरकार के समक्ष कुछ राजकोषीय परेशानियां हैं। एक झटके में कर दर को घटाकर 25 प्रतिशत करना मुश्किल है क्योंकि इसका वित्तीय खामियाजा काफी अधिक होगा।

ऐसे में सरकार अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों के साथ न्याय नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार के विभिन्न नीतिगत उपायों के बाद अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत से अधिक रह सकती है।

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