इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ उठाएं राइडर का लाभ, टैक्स में भी मिलेगी छूट
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अपने भविष्य को संवारने के लिए हर कोई बीमा लेता है। बीमा न सिर्फ स्वास्थ्य, बल्कि घर और गाड़ी की भी रक्षा करता है। आजकल ग्राहकों को बीमा पॉलिसी में राइडर दिया जाने लगा है। यानी पॉलिसी में कवर होने वाले जोखिम के साथ-साथ दूसरे किसी जोखिम को उसी पॉलिसी के साथ जोड़ लेना। आइए जानते हैं इसके बारे में।
अतिरिक्त इंश्योरेंस कवर का मिलता है फायदा
राइडर के जरिए आप किसी भी बीमा पॉलिसी के साथ कोई अटैचमेंट कर सकते हैं। राइडर इंश्योरेंस में ऐड ऑन कवर होता है, जिससे अतिरिक्त इंश्योरेंस कवर और फायदा मिलता है। बता दें कि इंश्योरेंस राइडर को बेसिक पॉलिसी से जोड़ा जाता है, इसलिए बेसिक पॉलिसी के समाप्त होते ही, राइडर का कवरेज भी खत्म हो जाता है।
टैक्स में भी मिलती है छूट
खास बात ये है कि 80सी के तहत राइडर के प्रीमियम पर टैक्स में छूट भी मिलती है। वहीं 80डी के तहत हेल्थ व क्रिटिकल इलनेस राइडर पर लाभ मिलता है। इसके साथ ही सेक्शन 10(10डी) के तहत कर छूट के दायरे में राइडर पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है।
राइडर के प्रकार
अगर आप भी राइडर को लेते हैं तो विकलांगता की स्थिति, किसी गंभीर बीमारी या पैसे की कमी से प्रीमियम नहीं भर पाने की स्थिति में भी पॉलिसी चलती रहती है। इस तरह के राइडर में बीमा की अवधि, समएश्योर्ड और दूसरे लाभ जारी रहते हैं। वहीं टर्म राइडर के तहत बीमाधारकों को टर्म प्लान जैसी ही सुविधा मिलती है। इसकी खास बात यह है कि इस राइडर को लेने पर पॉलिसीधारक के नॉमिनी को समएश्योर्ड के अलावा भी रकम मिलती है। हालांकि यह अतिरिक्त रकम राइडर में दी गई शर्त पर निर्भर करती है।
बता दें कि मेडिकल हिस्ट्री प्रीमियम निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भाग रखती है। पॉलिसी लेते वक्त धारक को कोई बीमारी है तो कंपनियां अतिरिक्त प्रीमियम लेती हैं जिसे लोडिंग के नाम से जाना जाता है। वहीं जिस व्यक्ति को प्री एक्जिजटिंग डिसीज नहीं है उनसे अतिरिक्त प्रीमियम नहीं लिया जाता है। इसके अलावा धूम्रपान, मदिरापान और व्यवसाय भी प्रीमियम निर्धारित करते समय ध्यान में रखे जाते हैं।