बनारस में बैंक, डाकघर निवेशकों की पहली पसंद

नई दिल्ली/वाराणसी/ब्यूरो Updated Fri, 02 Nov 2012 08:15 PM IST
investors first choice bank post office in varanasi
परंपराओं के साथ गहरे जुड़े शहर बनारस के निवेशक अब भी शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड आदि में निवेश करने की बजाय डाकघर और बैंकों की पारंपरिक बचत योजनाओं को ज्यादा तरजीह दे रहे है।

शहर के निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव को देखते हुए लोग पूंजी बाजार में कम निवेश कर रहे हैं। शहरवासियों को डाक विभाग, बैंक और आयकर बचत के लिए बीमा पॉलिसियां ही ज्यादा भा रही हैं। इसकी प्रमुख वजह ऐसे निवेश में जोखिम कम होना और रिटर्न की गारंटी होना है।

शहर के प्रवर डाक अधीक्षक एसएस मिश्रा के अनुसार डाक विभाग की योजनाओं में पिछले साल के मुकाबले तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा लोग बचत खाते और आवर्ती खाते को तरजीह दे रहे है। इस साल कुल जमा योजनाओं में 105 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं बचत खाते में पिछले साल के मुकाबले इस साल 490 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सावधि जमा एक वर्षीय में 32 फीसदी, दो वर्षीय जमा में 110 फीसदी, पांच वर्षीय जमा में 32 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

एसर्बीआई के एजीएम अमित झिंगरन के मुताबिक लोगों का झुकाव बैंक डिपॉजिट की ओर बढ़ा है। खासतौर से वरिष्ठ नागरिक अपना निवेश बैंकों में करना सुरक्षित समझ रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं में पिछले साल के मुकाबले इस साल समान अवधि में 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक जेएस टोलिया के अनुसार निजी कंपनियों की तुलना में भारतीय जीवन बीमा निगम की पॉलिसियों में निवेश बढ़ा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल समान अवधि में बीमा पॉलिसियों में लगभग 14 फीसदी निवेश बढ़ा है। वहीं शेयर बाजार में जोखिम बढ़ने के चलते यूलिप पॉलिसियों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। गिने चुने ग्राहक ही यूलिप पॉलिसी ले रहे हैं।

इक्विटी बाजार में निवेशकों की रुचि कम होने के बारे में ब्रोकर्स का कहना है कि साल 2008 के ग्लोबल आर्थिक संकट के समय निवेशकों को पूंजी बाजार में भारी नुकसान हुआ है। इसका असर कारोबार पर दिख रहा है। बनारस में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 300 विभिन्न कंपनियों के शेयर टर्मिनल थे। इनमें आधे से ज्यादा बंद हो चुके हैं।

सब ब्रोकर सुनील बंसल के अनुसार शेयर टर्मिनलों पर काम नहीं रह गया है। लोग इस आस में टर्मिनल खोलकर बैठे हुए हैं कि शायद फिर निवेशकों का विश्वास लौट आए। निवेश सलाहकार संजीव राव ने कहा कि चार वर्ष पहले सभी शेयर टर्मिनलों पर सुबह 10 बजे से शाम तीन बजे तक भीड़ लगी रहती थी। छोटे-बड़े सभी निवेशक रोज शेयरों की खरीद-फरोख्त करते थे, पर अभी ऐसा माहौल नहीं है।

भले ही शहर में निवेशकों का रुख पूंजी बाजार की ओर कम है, फिर भी कंपनियों को अपने ग्रोथ के लिए छोटे शहर ही नजर आ रहे हैं। उनके अनुसार अब ग्रोथ छोटे शहरों से ही आएगी, ऐसे में वह अपना ज्यादा से ज्यादा नेटवर्क इन्हीं शहरों में बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।

इनपुट: दिल्ली टीम के साथ बनारस से संजय प्रसाद सिंह

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