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आसान होगी घर बैठे रिटर्न भरने की राह

Fri, 21 Jun 2013 10:28 PM IST
बंगलूरू/हरवीर सिंह
बंगलूरू/हरवीर सिंह Updated Fri, 21 Jun 2013 10:28 PM IST
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income tax returns would be easy to filing

आय करदाताओं के लिए घर बैठे रिटर्न भरने की राह आसान होने जा रही है। उन्हें हर साल ई-रिटर्न भरने के लिए डिजिटल सिग्नेचर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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साथ ही जो आयकरदाता ई-रिटर्न भरते हैं और उसके बाद उनको रिटर्न की कॉपी पोस्ट ऑफिस के जरिए सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) बंगलूरू को भेजनी पड़ती है, उसकी जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
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इसके लिए आयकर विभाग ई-रिटर्न भरने वाले लोगों को एक पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर (पिन) जारी करेगा। यह पिन इस बात का सुबूत होगा कि रिटर्न भरने वाला व्यक्ति सही है। साथ ही कानूनी रूप से वह रिटर्न में दी गई जानकारी की जिम्मेदारी भी लेता है।
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यहां सीपीसी में रिटर्न की प्रोसेसिंग से लेकर स्क्रूटनी व रिकॉर्ड को डिजिटल करने और फिर उसे हार्ड कापी के रूप में स्टोर करने तक की प्रक्रिया में अपनाई जा रही टेक्नोलॉजी की जानकारी देते हुए मुख्य आयकर आयुक्त के. सत्यनारायण ने बताया कि हमें उम्मीद है कि इसे चालू वित्त वर्ष में लागू कर दिया जाएगा।

देशभर के चार करोड़ से ज्यादा आयकरदाताओं की रिटर्न की प्रोसेसिंग से लेकर करदाताओं को कंफर्मेशन और टैक्स रिफंड भेजने तक सारा काम सीपीसी में होता है। इस काम में विभाग के केवल 35 अधिकारी शामिल हैं। रिटर्न प्रोसेसिंग और उसके कॉल सेंटर का जिम्मा इनफोसिस के पास है जबकि ई-रिटर्न का कॉल सेंटर टीसीएस के पास है।

ई-रिटर्न की इस सुविधा के तहत हर साल जब आयकरदाता विभाग के पोर्टल पर जाएगा, तो उसके पैन कार्ड और पुराने रिकॉर्ड को जांचने के बाद यह छह डिजिट का पिन जनरेट हो जाएगा। हर साल नया पिन जारी होगा।

ई-रिटर्न के जरिए आयकरदाताओं और आयकर विभाग को हो रहे फायदे के बारे में आयकर आयुक्त सतीश के. गोयल ने बताया कि पिन व्यवस्था लागू करने के लिए आयकर विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है।

लेकिन, इसकी कानूनी वैधता के लिए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा। उम्मीद है कि संसद के आगामी सत्र में यह संशोधन कर लिया जाएगा। इसके बाद भले ही नौकरीपेशा आयकरदाता चालू साल में इसका उपयोग न कर पाएं लेकिन इसके बाद सितंबर और नवंबर तक आयकर रिटर्न भरने की सुविधा पाने वाले लोग इसका उपयोग कर सकेंगे।


उन्होंने बताया कि ई-रिटर्न भरने को लेकर लोगों के बढ़ते चलन का ही नतीजा है कि 2006 में जब इसे शुरू किया गया, तो केवल चार लाख ई-रिटर्न भरे गए थे। लेकिन पिछले साल यह आंकड़ा 2.14 करोड़ तक पहुंच गया था। चालू साल में ई-रिटर्न की संख्या ढाई करोड़ पहुंचने का अनुमान है जो कुल रिटर्न संख्या का 75 फीसदी होगा।

अमेरिका जैसे देश में जहां लंबे समय से यह व्यवस्था है, वहां भी ई-रिटर्न का प्रतिशत यही है। वैसे भी पांच लाख से ऊपर की सालाना आय वाले सभी लोगों को चालू साल से ई-रिटर्न ही भरना अनिवार्य है और कंपनियों के लिए यह प्रावधान पहले से ही लागू है, तो ई-रिटर्न की संख्या में इजाफा होना ही है।

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