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बजट के बाद होम लोन होगा सस्ता, आरबीआई इस वजह से अपना सकता है नरम रुख

Wed, 16 Jan 2019 05:30 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 16 Jan 2019 05:30 PM IST
सार

  • केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट पर मिल सकती है राहत
  • 50 आधार अंक की कटौती हो सकती है नीतिगत दरों में साल की पहली छमाही में
  • 6.5 फीसदी है अभी आरबीआई का रेपो रेट दो बार बढ़ोतरी करने के बाद 

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home loan may become cheaper as rbi can cut repo rate
- फोटो : PTI

विस्तार

महंगाई के मोर्चे पर दोहरी राहत मिलने के बाद रिजर्व बैँक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) फरवरी में होने वाली समीक्षा बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर नरम रुख अपना सकती है। कोटक की ओर से वित्तीय सेवा क्षेत्र पर जारी एक अनुसंधान रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

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रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने अभी तक मौद्रिक नीति के बारे में सख्त रुख अपना रखा है। लेकिन थोक और महंगाई के हालिया आंकड़े देखने के बाद एमपीसी अपने रुख में बदलाव कर सकती है। खुदरा महंगाई दिसंबर में 18 माह के निचले स्तर 2.19 फीसदी और थोक महंगाई आठ माह के निचले स्तर 3.80 फीसदी पर पहुंच गई है। 
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यह लगातार पांचवां महीना था जब खुदरा महंगाई आरबीआई के अनुमानित लक्ष्य 4 फीसदी से नीचे रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि 7 फरवरी को एमपीसी की चालू वित्त वर्ष में छठी बैठक होनी है, जो नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला करते समय खुदरा महंगाई को ध्यान में रखती है। 
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हालांकि, वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में विकास दर घटकर 6.6 फीसदी रहने के अनुमान और कोर महंगाई की आशंका भी गहरा रही है। इसके अलावा क्रूड ऑयल की उतार-चढ़ाव भरी कीमतें और राजकोषीय घाटे में इजाफा होने के संकेतों से एमपीसी पर सख्त रुख बरकरार रखने का दबाव रहेगा। एमपीसी ने चालू वित्त वर्ष में दो बार लगातार नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की थी।

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खुदरा कर्ज बढ़ने से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

देश के अधिकतर सरकारी बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ और बैड लोन के कारण बैंकिंग तंत्र काफी समय से मुश्किल में है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दर में गिरावट से खुदरा कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और इसमें इजाफे से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है। 

बैंकों का बढ़ रहा भरोसा

औद्योगिक और कारोबारी लोन के बड़ी मात्रा में एनपीए होने के कारण बैंकों का रुझान खुदरा कर्ज देने की ओर बढ़ रहा है। क्रेडिट ब्यूरो सहित अन्य सुधारवादी कदमों के बाद उनका भरोसा खुदरा कर्जदारों में मजबूत हुआ है।

वर्ष 2013 में जहां बैंकों के कुल कर्ज में खुदरा कर्ज का हिस्सा 18.3 फीसदी था, वहीं मार्च,2018 में यह 24.8 फीसदी हो गया। इसके बाद अक्तूबर के हालिया आंकड़ों में यह हिस्सा 25.5 फीसदी पहुंच गया है।

आधे से ज्यादा खुदरा कर्ज

देश के तीन सबसे बड़े बैंकों के आंकड़ों को देखें तो उनके कुल कर्ज में से आधे से ज्यादा हिस्सा खुदरा कर्ज का है। एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के लोन बुक में खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है। इसी तरह, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक के लोन बुक में भी खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है।

कॉरपोरेट लोन में तेजी से काफी ज्यादा गिरावट आई है। ऐसे में हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक कुल कर्ज में खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी बढ़कर 60 फीसदी हो जाएगी। 
-पीके गुप्ता, प्रबंधन निदेशक (खुदरा बैँकिंग) एसबीआई

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