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होम लोन में डिफॉल्ट के डर से बैंक हुए सतर्क
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 08 Oct 2013 08:08 PM IST
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ईएमआई न चुका पाने के मामले को बढ़ता देख बैंक अब होम लोन, कार लोन ग्राहकों को एसएमएस, ई-मेल और फोन के जरिए अपनी किश्त सही समय पर चुकाने की अपील कर रहे है।
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इसके लिए बैंकों ने ग्राहकों को एसएमएस, ई-मेल और फोन के जरिए उनकी ईएमआई देने की तिथि को रिमाइंड करा रहे हैं। जिससे कि ग्राहक पहले से ही ईएमआई चुकाने के लिए सतर्क रहे।
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बैंकर्स के अनुसार मौजूदा आर्थिक माहौल में जब डिफॉल्ट तेजी से बढ़ रहे हैं, बैंक पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हो गए हैं। जिसकी वजह से रिमाइंडर की आवृत्ति बढ़ी है।
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पंजाब नेशनल बैंक के जनरल मैनेजर एसएस भाटिया के अनुसार बैंक अपने रिटेल ग्राहकों को एसएमएस के जरिए ईएमआई भुगतान की तिथि की सूचना देता है। जिसके जरिए हमारा मकसद केवल यह है कि ग्राहक सजग रहे।
वहीं इंडियन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पिछले सात-आठ महीने में बैंक कहीं ज्यादा सतर्क हुए हैं। एसएमएस, ई-मेल के जरिए हमारा मकसद ग्राहकों को सजग रखना है।
कई बार ऐसा होता है कि इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सुविधा (ईसीएस) के बावजूद ग्राहक के खाते में पर्याप्त राशि नहीं रहती है, तो ईएमआई बाउंस हो जाती है। ऐसे में ग्राहक को सजग रखने से वह खाते में पर्याप्त राशि रख सकेगा।
उन्होंने बताया कि मौजूदा आर्थिक माहौल में जब डिफॉल्ट बढ़ा है, बैंक हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि डिफॉल्ट में कमी लाई जा सके।
पंजाब एंड सिंध बैंक के सीजीएम जीएस बिंद्रा के अनुसार बैंक इस तरह की सूचना देकर केवल ग्राहकों को सजग करते हैं। इससे कई बार ऐसे ग्राहक जो डिफॉल्ट नहीं करना चाहते हैं, पर अनजाने में डिफॉल्ट कर जाते हैं, उन्हें समय से पहले सूचना मिलने पर सुविधा हो जाती है।
क्यों बढ़ा खतरा
बैंकर्स के अनुसार डिफॉल्ट बढ़ने की प्रमुख वजह ऊंची ब्याज दर और महंगाई है। साल 2010 के आखिरी में औसतन होम लोन की ब्याज दर 9.5 फीसदी के करीब थी। जो कि अब 10.5-11.0 फीसदी की बीच आई गई है।
इसी तरह कार लोन औसतन 11-12 फीसदी के बीच है। खुदरा महंगाई दर अगस्त 2013 में 10.75 फीसदी पर है। जिसका असर लोगों की बचत क्षमता पर हुआ है। इसके अलावा ऑटो सेक्टर, टेलीकॉम आदि सेक्टर में नौकरियां छूटने का असर भी भुगतान पर पड़ रहा है।