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अनोखा ऑफर: इस देश में तीन सालों के लिए बिना नौकरी किए घर बैठे मिलेंगे 38 लाख रुपये

Sat, 29 Aug 2020 10:13 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sat, 29 Aug 2020 10:13 AM IST
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Germany to launch a new experiment in universal basic income people will get money for three years
यूरो - फोटो : pixabay

कोरोना काल में हर किसी की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। एक ओर जहां करोड़ों लोगों को अपनी नौकरी खोने का डर है, वहीं कई लोगों के वेतन में कटौती की जा रही है। ऐसे में जर्मनी में एक कमाल का ऑफर आया है, जिसके तहत तीन साल तक आपके बैंक खाते में हर महीने 1200 यूरो डलते रहेंगे और इसके लिए कोई नौकरी भी नहीं करनी होगी। इस तरह से तीन साल में हर व्यक्ति को 43,200 यूरो यानी करीब 38 लाख रुपये मिल जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की अध्यक्षता जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के युएर्गन शुप कर रहे हैं।

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आपको क्या करना होगा?
इस काम के लिए आपको रिसर्च के कुछ सवालों के जवाब देने हैं कि इस पैसे का वे क्या कर रहे हैं, उसके साथ वे जी पा रहे हैं या नहीं, मुफ्त में पैसे मिल रहे हों तो कौन नहीं लेना चाहेगा? इस प्रोजेक्ट के लिए रिसर्चर सिर्फ 1500 लोगों को ढूंढ रहे थे, लेकिन अब तक उन्हें 15 लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं, जिनमें से 120 लोगों को ही चुना जाएगा। 
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मालूम हो कि इसके लिए आपको तीन सालों में कुल सात सर्वे फॉर्म भरने होंगे और इसकी सबसे खास बात ये है कि धन पर कोई टैक्स भी नहीं लगेगा। इस प्रोजेक्ट पर कुल खर्चा 52 लाख यूरो का होगा, जो बर्लिन स्थित एक चैरिटी संस्था उठाएगी। 
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इसलिए शुरू हो रहा है प्रोजेक्ट
चैरिटी संस्था 'माइन ग्रुंडआइनकॉमन' यानी 'माय बेसिक पे' के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का मकसद यह जानना है कि अगर लोगों को जिंदगी की जरूरतें पूरे करने के लिए पैसा मिलता रहे और इसके लिए उन्हें कोई काम ना करना पड़े, तो वे कितनी खुशहाल जिंदगी बिता सकते हैं और कितने रचनात्मक हो सकते हैं?

इस संदर्भ में डॉयचे वेले से बातचीत में युएर्गन शुप ने कहा कि, 'वे देखना चाहते हैं कि क्या लोग पूरा पैसा खर्च कर देंगे या फिर इसमें से कुछ बचत करेंगे। साथ ही यह भी जानना है कि क्या वे अतिरिक्त धन राशि मिलने से अपनी नौकरी छोड़ देते हैं या फिर अपना काम जारी रखेंगे।'। 


सबसे अहम यह समझना है कि पैसा कैसे लोगों के रवैये को बदलता है क्योंकि इस सवाल पर आज तक कोई वैज्ञानिक शोध नहीं हुआ है। प्रोजेक्ट के समर्थकों का मानना है कि इससे समाज में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेंगे और लोग खुशहाल जीवन जिएंगे। जबकि कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह लोगों को आलसी बना देगा।

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