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इस तरह होता है संपत्ति का वसीयत

Sun, 13 Jan 2013 09:48 PM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क Updated Sun, 13 Jan 2013 09:48 PM IST
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for bequest follow these rule

वसीयत लिखकर व्यक्ति न केवल इच्छानुसार अपनी संपत्ति का बंटवारा कर सकता है बल्कि अपने उत्तराधिकारियों को पारिवारिक विवाद, कानूनी उलझनों व खर्चों से भी बचा सकता है। मानसिक रूप से स्वस्थ व 18 साल से अधिक का कोई भी व्यक्ति, जिसके पास चल-अचल संपत्ति, जीवन बीमा पॉलिसी आदि है, अपनी वसीयत लिख सकता है।

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वसीयत लिखने वाला व्यक्ति अपने जीवनकाल में अपनी वसीयत कितनी भी बार बदल सकता है और उसके द्वारा लिखी गई आखिरी वसीयत ही मान्य होती है। सबसे अहम बात यह कि वसीयत लिखने से व्यक्ति के जीवनकाल में संपत्ति पर उसी का हक रहता है और मृत्यु के बाद वारिस संपत्ति हासिल कर सकते हैं।
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वसीयत लिखना कोई बहुत जटिल या कठिन कार्य नहीं है। बल्कि, कुछेक बातों का ध्यान रखकर और अपने विवेक के जरिए सहज तरीके से वसीयत लिखी जा सकती है। वसीयत का एक लाभ यह भी है कि इससे वारिसों की टैक्स प्लानिंग भी की जा सकती है।
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इस तरह करें वसीयत
-वसीयत लिखने से पहले व्यक्ति को अपनी सभी संपत्तियों और दायित्वों का ब्योरा बना लेना चाहिए। इसमें सभी चल-अचल संपत्ति, जीवन बीमा पॉलिसी, दुर्घटना बीमा पॉलिसी व सभी तरह की जिम्मेदारियों का ब्योरा शामिल होना चाहिए।

-वसीयत लिखने वाले व्यक्ति को उन सभी परिजनों या रिश्तेदारों की सूची बना लेनी चाहिए, जिनके हक में वह अपनी वसीयत लिखना चाहता है।

-वसीयत लिखने वाला अपनी कौन सी संपत्ति किस वारिस को कितने अनुपात में देना चाहता है, इसका निर्धारण भी उसे पहले ही कर लेना चाहिए।

-वसीयत लिखने में वारिसों के संबंध में टैक्स प्लानिंग का ध्यान जरूर रखना चाहिए। यानी, जिन व्यक्तियों के हक में आप वसीयत लिखने जा रहे हैं, उन सभी की मौजूदा और भविष्य में वसीयत से मिलने वाली संपत्ति से होने वाली आमदनी पर टैक्स का आकलन कर लेना चाहिए। ताकि, उत्तराधिकारियों को भविष्य में वसीयत से अर्जित होने वाली आमदनी पर कम से कम टैक्स चुकाना पड़े। इसके लिए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की मदद भी ली जा सकती है।

-अकसर लोग इस बात को लेकर ऊहापोह में रहते हैं कि वसीयत स्टॉप पेपर या लीगल पेपर ही लिखना चाहिए। जबकि, वास्तविकता में ऐसा अनिवार्य नहीं है। वसीयत साधारण पेपर पर भी लिखी जा सकती है और वह मान्य होती है।

-कानूनी रूप से वसीयत हस्तलिखित या टाइप्ट किसी भी रूप में लिखी जा सकती है। लेकिन, वसीयत सही-सही व ठीक ढंग से पढ़ी जा सके इसके लिए उसे टाइप करा लेना बेहतर होता है।

-वसीयत स्पष्ट भाषा व साफ शब्दों में लिखी जानी चाहिए। इसमें किसी कानूनी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना होता है। स्पष्ट भाषा व शब्द से मतलब यह है कि वसीयत करने वाले व्यक्ति का उद्देश्य स्पष्ट हो और भविष्य में विवाद की स्थिति न पैदा हो।

-वसीयत लिखने वाले व्यक्ति को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए वह कौन सी संपत्ति किस उत्तराधिकारी को व किस अनुपात में देना चाहता है। वसीयत में इसका उल्लेख स्पष्ट रूप में संपत्ति व उत्तराधिकारी के पूर्ण विवरण के साथ करना चाहिए।

-वैसे तो संपत्ति के बंटवारे के लिए निष्पादक नियुक्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। लेकिन, यदि संपत्ति अधिक है और विवाद की स्थिति पैदा होने की आशंका है, तो वसीयत लिखने वाले को अपने किसी खास व्यक्ति को निष्पादक नियुक्त कर देना चाहिए।

-वसीयतकर्ता को वसीयत के प्रत्येक पेज पर अपना हस्ताक्षर करना चाहिए। यह अनिवार्य होता है। साथ ही साथ वसीयत में दो गवाह अनिवार्य रूप से होने चाहिए। गवाह ऐसे व्यक्ति को बनाना चाहिए, जो परिचित हों, वयस्क हों और जिनका वसीयत में कोई हित न जुड़ा हो।

-वसीयत को लेकर भविष्य में किसी विवाद या उलझनों से बचाव के लिए वसीयत का रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए। वैसे वसीयत को रजिस्ट्रेशन या नोटरी करना अनिवार्य नहीं होता है। लेकिन, रजिस्ट्रेशन कराने का लाभ यह है कि वसीयत गुम हो जाने पर उसकी कॉपी प्राप्त की जा सकती है। वसीयत का रजिस्ट्रेशन सब रजिस्ट्रार ऑफिस में कराया जा सकता है।


होलोग्राफिक वसीयत
यह वसीयत वसीयतकर्ता द्वारा पूरी तरह से हस्तलिखित होती है। आमतौर पर वसीयत पर सत्यापन के लिए दो गवाहों के दस्तखत की आवश्यकता होती है लेकिन अधिकतर न्यायिक मामलों में होलोग्राफिक वसीयत, जिस पर गवाह का दस्तखत नहीं होता, को भी गवाह के दस्तखत वाली वसीयत की तरह ही माना जाता है।

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