{"_id":"67686d62-3cf4-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"first-investor-get-gain-in-equity-market","type":"story","status":"publish","title_hn":"उठान लेने से पहले निवेश करने वाले को मिलता है फायदा","category":{"title":"Personal Finance","title_hn":"पर्सनल फाइनेंस","slug":"personal-finance"}}
उठान लेने से पहले निवेश करने वाले को मिलता है फायदा
नई दिल्ली/उमेश्वर कुमार
Updated Mon, 03 Dec 2012 08:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शेयर बाजार की तेजी हमेशा से बाजार की दहलीज पर खड़े लोगों को लुभाती रही है, ऐसे लोग तेज बाजार में निवेश करते हैं और अधिकांश अपने हाथ जला बैठते हैं। बीते कुछ समय से बाजार निवेश के मोड में है, विशेषज्ञ इसे निवेश का माकूल समय बता रहे हैं, लेकिन फिलहाल निवेशकों की बड़ी संख्या बाजार का रुख नहीं कर रही।
विज्ञापन
जैसै-जैसे बाजार तेजी का रुख पकडे़गा इस तरह के निवेशकों की भीड़ बढ़ेगी। कुछ इसी तरह की भीड़ पिछली तेजी में आई थी, जिसमें अलग-अलग सेक्टरों में काम करने वाले युवकों की फौज लगी-लगाई नौकरी छोड़ कर शेयर बाजार के मोहपाश में आ गई और उन्हें कैशिनो की तरह इसका नशा हो गया।
विज्ञापन
सब डे ट्रेडर हो गए और जब तक बाजार तेज रहा इन्हें तेजी के नशे का किक मिलता रहा। बाजार के शांत होते ही इनका मोह भंग होना शुरू हो गया। कुछ इसी तरह का कैशिनो नशा बाजार में तब आया था जब एनएसई पर स्क्रीन ट्रेडिंग की शुरुआत हुई थी। इस तरह की मौसमी भीड़ को निवेशक नहीं कहते।
विज्ञापन
बाजार का निवेशक किसे कहें
बाजार में हर तरह के कारोबारी होते हैं, डे ट्रेडर से लेकर बीटीएसटी यानी बाई टुडे सेल टुमौरो तक के। निवेशक कहलाने के लिए जरूरी है कि शेयर की खरीदारी पूरे भुगतान के साथ लंबी अवधि के लिए की जाए। सिर्फ मार्जिन मनी के आधार पर सौदे को खड़ा रखने वाले को निवेशक नहीं, बल्कि सटोरिया कहते हैं।
सटोरियों की खरीदारी से बाजार में कारोबार का आयतन (वाल्यूम) जरूर बढ़ता है, लेकिन निवेशगत खरीदारी नहीं होती। निवेश के लिए जरूरी है कि शेयर की खरीदारी के बाद इसे अपने डीमैट खाते में ट्रांसफर करा लिया जाए।
कितनी रकम का हो निवेश
इसके लिए शेयर बाजार से कोई बंधन नहीं होता। शेयरों के इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में आ जाने के बाद किसी कंपनी का एक शेयर भी खरीदा जा सकता है। डीमैट से पहले यह संभव नहीं था, किसी भी शेयर के कम से कम एक लॉट को खरीदना होता था। अधिकांश कंपनियों के शेयर 100 की लॉट में होते थे।
ऑड लॉट वाले शेयरों के भाव अलग होते थे। शेयर खरीदने का निर्णय निवेशक के पोर्टफोलियो के हिसाब से तय होगा। एक अच्छा निवेशक हमेशा अपना पोर्टफोलियो बनाकर चलता है। माना कि उसे एक लाख रुपये निवेश करने हैं तो वह पहले यह तय करेगा कि इसमें से कितनी रकम का निवेश इक्विटी के लिए करेगा। शेयर बाजार के जोखिम को देखते हुए बड़ी उम्र के लोग शेयरों के लिए कम रकम निकालते हैं जबकि कम उम्र के लोग अधिक रकम।
किन शेयरों की करें खरीदारी
इसके कुछ खास उसूल हैं जिन्हें जानते तो अधिकांश निवेशक हैं, लेकिन अमल में लाने वालों का प्रतिशत काफी कम होता है। शेयर ब्लूचिप हो तो सर्वोत्तम अन्यथा वैसी कंपनी जो बीते पांच साल से लाभांश दे रही हो और वैसे धंधे से जुड़ी हो जो आने वाले समय में फेज आउट होने वाला नहीं हो। बाजार में कंपनियों के शेयरों के ऑफर आते हैं जिन्हें आईपीओ और एफपीओ कहते हैं। शेयर बाजार में निवेश का एक जरिया यह भी है।
कब करें बाजार में निवेश
बहुत तेज बाजार में निवेश से बचना चाहिए। बाजार जब स्थायी भाव में हो, अर्थव्यवस्था में विकास के लक्षण दिखें तब अच्छी कंपनियों में लंबी अवधि का निवेश अच्छा रहता है जिन सेक्टर में विकास की गुंजाइश दिख रही है। विशेषज्ञों की मानें तो बाजार में निवेश के लिए इस तरह की स्थितियां बनी हुई हैं।
टिप्स पर न खरीदें शेयर
कभी भी टिप्स के आधार पर निवेश न करें। तकनीक के नए युग में अब एसएमएस से लेकर मेल तक टिप्स से भरे रहते हैं और अधिकांश टिप्स के पीछे कुछ खास समूह के निहित स्वार्थ छिपे होते हैं।
सबसे पहले खोलें डीमैट खाता
शेयर बाजार में निवेश की पहली जरूरत है डीमैट खाते का होना। बैंक खाते की तरह ही निवेशक को सबसे पहले किसी भी डीपी यानी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के पास अपना डीमैट खाता खोलना होगा। यह खाता एक तरह से निवेशक के शेयरों का इलेक्ट्रानिक लॉकर होता है जहां वह अपने शेयर खरीदकर रखता है और चेक की तरह की पर्ची से वह शेयर बेचने का निर्देश अपने ब्रोकर को देता है।
डीमैट खाते के साथ निवेशक को बैंक खाता और किसी ब्रोकर के पास शेयर खाता खोलना होता है। वहां वह शेयरों की खरीद-बिक्री फोन के माध्यम से अपने ब्रोकर को निर्देश देकर करा सकता है अथवा ब्रोकर से पासवर्ड और ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर अपने सिस्टम पर डलवाकर ब्रोकर द्वारा दी गई राशि सीमा के भीतर शेयरों की खरीद बिक्री खुद कर सकता है।
कंपनियों के शेयरों के अलावा कमोडिटी का कारोबार भी काफी बढ़ गया है, लेकिन आम निवेशक को कमोडिटी बाजार में तब तक उतरने से परहेज करना चाहिए जबतक कि उसे इसकी बारिकियों का ज्ञान न हो जाए। यहीं बात फ्यूचर और ऑप्शन पर भी लागू होती है।