पीएफ पर 8.65 फीसदी ब्याज मिलने में हो सकती है दिक्कत, वित्त मंत्रालय ने खड़ा किया सवाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छह करोड़ से अधिक पीएफ अंशधारकों को 8.65 फीसदी की दर पर इस वित्त वर्ष में ब्याज मिलेगा, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल वित्त मंत्रालय ने एक ऐसा सवाल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से कर दिया है, जिसका जवाब मिलने के बाद ही ब्याज दर को तय किया जाएगा।
आईएलएंडएफएस संकट बना कारण
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आईएलएंडएफएस में ईपीएफओ ने अपना बहुत सारा पैसा निवेश कर रखा है। आईएलएंडएफएस फिलहाल दिवालिया होने की कगार पर है। ऐसे में क्या ईपीएफओ के पास इस साल पर्याप्त फंड है, जिससे वो इतनी दर पर अंशधारकों को ब्याज दे सकेगा।
पिछले सप्ताह वित्त मंत्रालय ने श्रम सचिव को एक पत्र भेजकर सवाल उठाया है कि पिछले वर्षों में पीएफ ब्याज दर के भुगतान के बाद सरप्लस को केवल ईपीएफओ के अनुमानों में क्यों दिखाया है जबकि यह वास्तव में नहीं दिखता है। साथ हीमंत्रालय ने आईएलएंडएफएस और इसके जैसे जोखिम भरे निवेश के बारे में जानकारी मांगी है। यह पत्र दोनों मंत्रालयों के बीच कई दौर की चर्चा के बाद भेजा गया है।
आय से ज्यादा खर्च कर रहा ईपीएफओ
2016-17 के लिए ईपीएफओ के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऑडिट खातों में आय से अधिक व्यय दर्ज है। हालांकि, यह डाटा विशिष्ट विवरण नहीं देता है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, हम पहले भी सरप्लस फंड को लेकर श्रम मंत्रालय के सामने सवाल उठा चुके हैं। अधिकारी का कहना है कि यदि ईपीएफओ डिफॉल्ट करता है तो ग्राहकों को भुगतान की जिम्मेदारी सरकार के पास होगी। ईपीएफओ के पास कुल 8 लाख करोड़ रुपये का फंड है।
ईपीएफओ के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उनकी तमाम गणना सही है। पिछले 20 वर्षों से ज्यादा समय से ऐसे ही गणना होती रही है। जिस मेथडोलॉजी का इस्तेमाल करके ब्याज दर की गणना की जाती है वह नई नहीं है। वित्त मंत्रालय ने कुछ सवाल पूछे हैं, उनका जवाब दे दिया जाएगा।
इन कंपनियों पर पड़ेगा असर
जिन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है उनमें राज्यों की बिजली बोर्ड, सरकारी कंपनियां और बैंक शामिल हैं। आईएलएंडएफएस में निवेशकों के मुताबिक 40 फीसदी पैसा पेंशन और पीएफ खाते का जमा है। बाकी 60 फीसदी रकम यस बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के द्वारा लोन के तौर पर दिया गया था।
91 हजार करोड़ की देनदारी
कंपनी पर फिलहाल 91 हजार करोड़ की देनदारी है। आईएलएंडएफएस अपने कर्जों की किस्त नहीं चुका पा रही है। इसके चलते न केवल कई बड़े बैंक संकट में पड़ गए हैं बल्कि प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड में पैसा लगाने वाले आम लोगों की मेहनत की कमाई भी दांव पर लगी है।
169 कंपनियों का समूह है आईएलएंडएफएस
2017-18 के आंकड़ों के अनुसार, आईएलएंडएफएस समूह में 169 कंपनियां हैं। इनमें आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स, आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विस लिमिटेड और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी कंपनी लिमिटेड आदि शामिल हैं।