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हेल्थ इंश्योरेंस में नहीं रहेगी दुविधा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 22 Feb 2013 08:28 PM IST
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हेल्थ इंश्योरेंस के तहत गंभीर बीमारी तय करने, कमरे का किराया तय करने, डे-केयर इलाज के तहत बीमारी शामिल होगी या नहीं, इलाज देने वाला संस्थान अस्पताल के दायरे में आएगा या नहीं, यह सब तय करने का अधिकार अब बीमा कंपनियों के पास नहीं रहेगा। इस कदम से बीमा लेने वाले ग्राहकों के लिए बीमा प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।
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बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए मानक तय कर दिए हैं। इसके तहत इरडा ने सभी कंपनियों के लिए गंभीर बीमारियों के नाम तय कर दिए हैं। यानी, कोई कंपनी अपने आंतरिक मानकों के आधार पर गंभीर बीमारी को खुद नहीं तय कर सकेगी। नए मानकों के आधार पर 11 बीमारियां अब गंभीर श्रेणियों के रूप में रखी जाएंगी।
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इसके तहत कैंसर जनित बीमारी, पहला दिल का दौरा, कोरोनेरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट, दिल के वाल्व का प्रत्यारोपण या हृदय प्रत्यारोपण, मरीज का कोमा में चला जाना, दोनों गुर्दों का खराब हो जाना, प्रमुख अंग प्रत्यारोपण, अंगों में स्थायी रूप से लकवा हो जाना सहित 11 प्रमुख बीमारियों को शर्तों के आधार पर शामिल किया गया है। इसी तरह, इरडा ने 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों में कम से कम 10 बेड और उससे ज्यादा की आबादी वाले शहरों के लिए कम से कम 15 बेड वाले संस्थान को अस्पताल की श्रेणी के रूप में रखा है।
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इरडा ने हेल्थ सेक्टर में बीमा के लिए प्रयोग में होने वाले 46 विभिन्न शब्दावलियों को एक निश्चित परिभाषा के जरिए उनका मानकीकरण किया है। इरडा के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में जागरुकता की कमी के साथ इस तरह की भी शिकायतें आ रही थी कि कंपनियों के द्वारा बीमा पॉलिसी की अपने आधार पर व्याख्या की जा रही है, जिससे बीमाधारकों को नुकसान हो रहा है।
ऐसे में मानकीकरण से अब सभी कंपनियों के लिए एक निश्चित मानक हो जाएंगे। इरडा द्वारा जारी किए गए यह मानक जीवन बीमा कंपनियों, गैर जीवन बीमा कंपनियों, केवल हेल्थ इंश्योरेंस देने वाली कंपनियों और टीपीए सेवाएं देने वाली कंपनियों पर लागू होंगी।
हेल्थ इंश्योरेंस के तहत गंभीर बीमारी तय करने, कमरे का किराया तय करने, डे-केयर इलाज के तहत बीमारी शामिल होगी या नहीं, इसी तरह इलाज देने वाला संस्थान हॉस्पिटल के दायरे में आएगा या नहीं, यह सब तय करने का अधिकार अब बीमा कंपनियों के पास नहीं रहेगा। इस कदम से बीमा लेने वाले ग्राहकों के लिए बीमा प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए मानक तय कर दिए है। जिसके तहत इरडा ने सभी कंपनियों के लिए गंभीर बीमारियों के नाम तय कर दिया है। यानी कोई कंपनी अपने आंतरिक मानकों के आधार पर गंभीर बीमारी को खुद नहीं तय कर सकेगी। नए मानकों के आधार पर 11 बीमारियां अब गंभीर श्रेणियों के रुप में रखी जाएंगी।
इसके तहत कैंसर जनित बीमारी, पहला दिल का दौरा, कोरोनेरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट, दिल के वाल्व का प्रत्यारोपण या हृदय प्रत्यारोपण, मरीज का कोमा में चला जाना, दोनो गुर्दों का खराब हो जाना, प्रमुख अंग प्रत्यारोपण, अंगों में स्थायी रुप से लकवा हो जाना सहित 11 प्रमुख बीमारियों को शर्तों के आधार पर शामिल किया है। इरडा ने इसी तरह 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों में कम से कम 10 बेड और उससे ज्यादा की आबादी वाले शहरों के लिए कम से कम 15 बेड वाले संस्थान को अस्पताल की श्रेणी के रुप में रखा है।
इरडा ने हेल्थ सेक्टर में बीमा के लिए प्रयोग में होने वाले 46 विभिन्न शब्दावलियों को एक निश्चित परिभाषा के जरिए उनका मानकीकरण किया है। इरडा के अनुसार हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में जागरुकता की कमी के साथ इस तरह की भी शिकायतें आ रही थी कि कंपनियों के द्वारा बीमा पॉलिसी की अपने आधार पर व्याख्या की जा रही है। जिससे बीमा धारकों को नुकसान हो रहा है।
ऐसे में मानकीकरण से अब सभी कंपनियों के लिए एक निश्चित मानक हो जाएंगे। इरडा द्वारा जारी किए गए यह मानक जीवन बीमा कंपनियों, गैर जीवन बीमा कंपनियों, केवल हेल्थ इंश्योरेंस देने वाली कंपनियों और टीपीए सेवाएं देने वाली कंपनियों पर लागू होंगी।