{"_id":"c9b75d1a-5d9d-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"delivery-instruction-book-is-necessary-for-share-ransfer","type":"story","status":"publish","title_hn":"शेयर ट्रांसफर के लिए डीआई बुक होना जरूरी","category":{"title":"Personal Finance","title_hn":"पर्सनल फाइनेंस","slug":"personal-finance"}}
शेयर ट्रांसफर के लिए डीआई बुक होना जरूरी
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Sun, 13 Jan 2013 09:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर आप अपने डीमैट अकाउंट्स के शेयरों को किसी रिश्तेदार या दोस्त को ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया खासी आसान है। हर ब्रोकर/बैंक अपने डीमैट खाताधारक को डिलीवरी इंस्ट्रक्शन (डीआई) बुक देते हैं। आप जिस व्यक्ति को शेयर ट्रांसफर करना चाहते हैं, उसके लिए आपके पास डीआई बुक होना जरूरी है।
विज्ञापन
डीआई बुक, चेक बुक की तरह होती है, जिसमें नंबर वाली स्लिप होती हैं। शेयर ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति को अपना अकाउंट और जिस व्यक्ति के खाते में शेयर ट्रांसफर करने हों, उसके अकाउंट का ब्योरा भरने के बाद स्लिप पर दस्तखत करने होते हैं। ऐसे स्टॉक ट्रांसफर को ऑफ मार्केट ट्रांसफर कहा जाता है। इसमें केवल उसी अकाउंट से चार्ज लिया जाएगा, जिससे डेबिट इंस्ट्रक्शन जारी किए गए हों। जिस डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट (शेयर आएंगे) होंगे, उससे किसी तरह का चार्ज नहीं लिया जाएगा।
विज्ञापन
बाजार नियामक सेबी/एनएसडीएल ने क्रेडिट पर सभी तरह के चार्ज खत्म कर दिए हैं। दूसरा कम इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका सीडीएसएल के जरिए ऑनलाइन ट्रांसफर का है। हालांकि, इसमें शेयर ट्रांसफर के लिए जरूरी है कि ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति और शेयर पाने वाले व्यक्ति दोनों के पास सीडीएसएल डीमैट अकाउंट हो और उसे एक्टिवेट किया गया हो। एक्टिवेशन के बाद इसमें शेयर ट्रांसफर करने के लिए आपके पास डिजिटल टोकन होना चाहिए।
विज्ञापन
दूसरी ओर, शेयर खाताधारक की मृत्यु होने और नॉमिनेशन के मामले में शेयर ट्रांसफर के लिए नामित व्यक्ति को शेयरधारक के मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) के साथ लिखित में डीपी (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स) को आवेदन देना होता है।
साथ ही नामित व्यक्ति के अकाउंट में शेयर ट्रांसफर के लिए ट्रांसमिशन फॉर्म (शेयरों को ट्रांसफर करने वाला फॉर्म) भी भरना होता है। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद डीपी, संबंधित फॉर्म और दस्तखत के प्रमाणिकता की जांच करता है और उसके बाद शेयरों को ट्रांसफर करता है।
ऐसे भी कई मामले आते हैं, जिनमें शेयरधारक अपने वारिस का नॉमिनेशन नहीं कर पाते हैं। शेयरधारक की मृत्यु होने पर कानूनी वारिस को शेयर ट्रांसफर करवाने के लिए डीपी को ट्रांसमिशन फॉर्म भरकर देना होता है। साथ ही उसे यह सर्टिफिकेट भी देने होते हैं:
ए- शेयर खाताधारक का नोटराइज्ड डेथ सर्टिफिकेट
बी- सक्सेशन सर्टिफिकेट (उत्तराधिकार संबंधी) की नोटराइज्ड कॉपी या कोर्ट के आदेश की एक कॉपी जिसमें इस बात का उल्लेख हो कि मृत व्यक्ति ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी है।
सी- प्रोबेट की कॉपी (वसीयत सही होने संबंधी कोर्ट की कॉपी) या एडमिनिस्ट्रेशन का नोटराइज्ड लेटर।
हालांकि, अगर कानूनी वारिस या कानूनी प्रतिनिधि के पास बी और सी दस्तावेज नहीं हैं और ट्रांसमिशन एप्लीकेशन की तारीख को शेयरों की मार्केट वैल्यू एक लाख रुपये से ज्यादा नहीं है तो डीपी (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स) इन दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसमिशन प्रोसेस कर देता है:
ए- ट्रांसमिशन फॉर्म
बी- डेथ सर्टिफिकेट की नोटराइज्ड कॉपी
सी- नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर एक एफिडेविट
डी- सभी कानूनी वारिसों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (अनापत्ति प्रमाण पत्र)
इन सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद डीपी कानूनी वारिस के अकाउंट में बैलेंस शेयरों को ट्रांसफर कर देगा और ट्रांसमिशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट मृत व्यक्ति के अकाउंट को बंद कर देगा।
जहां तक टैक्स की बात है तो कैपिटल एसेट्स (शेयर/म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स आदि) के तहत आने वाली किसी भी प्रॉपर्टी के ट्रांसफर पर आमतौर पर टैक्स का मामला नहीं बनता है। टैक्स की देनदारी उस समय बनती है, जबकि ट्रांसफर के बाद शेयर पाने वाला व्यक्ति उसे बेचे। शेयरों को लंबी या छोटी अवधि के लिए रखा गया है, इस आधार पर टैक्स देनदारी तय होती है।