संकट: कोरोना से जंग जीते लोगों के लिए एक और मुसीबत, इंश्योरेंस मिलने में आ रही दिक्कत
जो लोग कोरोना से उबर गए हैं और इंश्योरेंस लेना चाहते हैं, उनके लिए स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस लेना मुश्किल हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग-अलग कंपनियों ने ऐसे लोगों के लिए तीन से छह महीने तक का 'कूलिंग ऑफ पीरियड' तय किया है।
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कोरोना काल में लोगों को स्वास्थ्य बीमा का महत्व समझ आया है। जिन लोगों ने पहले बीमा नहीं खरीदा था, वे अब अपने पूरे परिवार के लिए इंश्योरेंस ले रहे हैं। वहीं जिन लोगों ने पहले से बीमा ले रखा था, वे इसका कवर बढ़ा रहे हैं। लेकिन जो लोग कोरोना से उबर गए हैं और इंश्योरेंस लेना चाहते हैं, उनके लिए स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस लेना मुश्किल हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग-अलग कंपनियों ने ऐसे लोगों के लिए तीन से छह महीने तक का 'कूलिंग ऑफ पीरियड' तय किया है। कूलिंग ऑफ पीरियड यानी कोरोना से मुक्त होने के कुछ समय बाद ही पॉलिसी जारी की जा रही है। संकट के इस समय में कोरोना से रिकवर हुए मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर नहीं है।
'कोरोना ग्रस्त लोगों को बीमा कंपनियां बहुत एहतियात से कवर कर रही हैं। कोरोना में चेस्ट हेल्थ संदिग्ध हो जाती है इसलिए इंश्योरेंस देने से पहले सारे टेस्ट कराने के बाद ही इंश्योरेंस प्रदान की जाती है।'
स्वास्थ्य बीमा से न सिर्फ अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से राहत मिलती है, बल्कि इससे आप पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ता है। यदि आपने भी अब तक स्वास्थ्य बीमा नहीं लिया है, तो निम्नलिखित बातों का खास ध्यान रखें।
- जोखिम को ध्यान में रखकर लें पॉलिसी- पॉलिसी खरीदने से पहले आपको जोखिम का भी ध्यान रखना पड़ेगा। कुछ ऐसे जोखिम हैं जो किसी भी वक्त आ सकते हैं। अगर हम इन बातों को ध्यान में रखके बीमा लें तो हम भविष्य में आने वाली मुसीबतों से आसानी से निपट सकेंगे। आपके परिवार में जो कमा रहा है, उसकी मृत्यु होने पर आपका पालन कैसे होगा इस बात का भी आपको ध्यान रखना चाहिए। आने वाले दिनों में बच्चों की पढ़ाई और शादी के खर्च को भी ध्यान में रखना चाहिए। घर में अगर कोई अचानक बीमार हो जाता है, तो उसका खर्च और व्यक्तिगत संपत्ति के नुकसान पहुंचने का डर भी हमें अकसर सताता है। जोखिम कईं हो सकते हैं। लेकिन अगर हम पहले से ही इनका ध्यान रखें तो हमारा भविष्य संवर सकता है।
- अच्छे से पढ़ लें सभी दस्तावेज- इंश्योरेंस खरीदते समय हमें कंपनियां कई सारे दस्तावेज देती हैं, जिनमें पॉलिसी की पूरी जानकारी लिखी होती है। लेकिन हम इन्हें पढ़ते नहीं है। ऐसे में आप अंजाने में कंपनी की कुछ ऐसी शर्त या बात मान लेते हैं जो आपको नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए कोई भी इंश्योरेंस प्लान खरीदने से पहले हमेशा पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज ध्यान से पढ़ लें। इसके अतिरिक्त सिर्फ प्रीमियम सस्ता होने से ही हमें पॉलिसी का चयन नहीं करना चाहिए। पॉलिसी खरीदने से पहले हमें कंपनी की प्रदर्शन भी देख लेना चाहिए।
- गंभीर बीमारी की कवर सूची को ध्यान से पढ़ें- क्लेम के खारिज होने से बचने के लिए दस्तावेजों और गंभीर बीमारी की कवर सूची को ध्यान से पढ़ें। कुछ बीमारियों के मामले में क्लेम की राशि पॉलिसी में तय सम अश्योर्ड राशि से परे अपेक्षाकृत कम होती है।
- अस्पताल में कमरे और ICU की सीमाएं- कई ऐसी कंपनियां हैं जो अस्पताल में कमरे और आईसीयू के लिए भुगतान को सीमित रखती हैं। उन सीमाओं के बाद का भुगतान पॉलिसीधारक को ही करना होता है। इसलिए इंश्योरेंस लेने से पहले इस बात पर ध्यान देना जरूरी है। केवल उन्हीं इंश्योरेंस पॉलिसी को चुनें जो आपके अस्पताल में भर्ती होने पर आपके पूरे इलाज (कमरे का किराया और नर्सिंग के खर्चों सहित) को कवर करती हैं।