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क्लेम करने पर ही मिलती है बीमे की राशि
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 26 Nov 2012 11:15 AM IST
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बीमा राशि का भुगतान क्लेम दाखिल करने पर ही किया जाता है। बीमा पॉलिसी पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को आर्थिक क्षतिपूर्ति मुहैया कराती है, लेकिन यह प्रक्रिया स्वत: नहीं होती। इसके लिए परिजनों को कंपनी के पास बीमे का क्लेम दाखिल करना होता है।
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आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा है कि इंश्योरेंस क्लेम के लिए काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं, पर अगर आपको अपनी बीमा पॉलिसी के प्रावधानों के बारे में पता है और आपके सारे कागजात सही हैं तो क्लेम हासिल करना बहुत मुश्किल काम नहीं है।
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बीमे का क्लेम हासिल करने के लिए सबसे पहले नॉमिनी को पॉलिसी धारक की मृत्यु की लिखित सूचना अपनी बीमा कंपनी को देनी होगी। इसके साथ ही क्लेम हासिल करने के लिए क्लेम फार्म भरकर जमा करना होता है, जोकि प्राय: बीमा कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध होता है या फिर इसे कंपनी के नजदीकी कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। आप अपने एजेंट से भी क्लेम फॉर्म मांग सकते हैं। दावे के जल्द निपटारे के लिए क्लेम फार्म भरते वक्त कुछ मूलभूत सावधनियां बरतना बहुत जरूरी होता है।
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फार्म में बीमा पॉलिसी का नंबर, बीमित व्यक्ति का नाम, तारीख और क्लेम की वजहों का विवरण स्पष्ट ढंग से दिया जाना चाहिए। दावा करने वाले व्यक्ति (नॉमिनी) का नाम और पता भी यथास्थान लिखा होना चाहिए। क्लेम फार्म के साथ जो कागजात जमा करने होते हैं, उनमें पॉलिसी डॉक्यूमेंट की मूल कॉपी, स्थानीय निकाय की ओर से जारी पॉलिसी धारक का मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट), दावा करने वाले का बयान, इलाज करने वाले डॉक्टर की ओर जारी सर्टिफिकेट, अगर क्लेम ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी का है, तो पॉलिसी धारक के नियोक्ता की ओर से जारी सर्टिफिकेट, अस्पताल में मृत्यु की स्थिति में एडमिशन नोट्स, डिस्चार्ज या डेथ समरी शामिल हैं।
मेच्योरिटी हासिल करने की प्रक्रिया
बीमे की अवधि पूरी होने पर पॉलिसी धारक के जीवित रहने पर पॉलिसी शर्तों के अनुसार वह कंपनी से मेच्योरिटी की राशि हासिल करने का हकदार होता है। इसके लिए भी एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। इसके लिए पूरी तरह भरा हुआ क्लेम फॉर्म, जीवन बीमा की पॉलिसी डॉक्यूमेंट, उम्र प्रमाण पत्र (अगर पहले नहीं जमा किया हो) और बैंक अकाउंट का विवरण, पैन कार्ड और जीवित होने का प्रमाण पत्र (प्रूफ ऑफ सर्वाइवल) जैसे दूसरे जरूरी कागजात की जरूरत पड़ती है।
ध्यान रखें बीमा कराने के बाद कंपनी द्वारा जारी इंश्योरेंस सर्टिफिकेट या बांड आपकी पॉलिसी का सबसे अहम दस्तावेज होता है। इसके बिना आपका दावा मुश्किल हो जाता है। अगर यह खो गया हो या नष्ट हो गया हो तो कंपनी से दूसरे बांड हासिल करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। बांड अगर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है ,तो बचा हुआ हिस्सा प्रमाण के तौर पर बीमा कंपनी में जमा किया जा सकता है। डुप्लीकेट कॉपी हासिल करने के लिए कोई तय नियम नहीं है।
कुछ बीमा कंपनियां आपको अपने खर्च पर अच्छी प्रसार संख्या वाले अंग्रेजी समाचारपत्र में इसके खोने का विज्ञापन छपवाने के लिए कहती हैं। विज्ञापन छपने के एक महीने के बाद सर्विसिंग ऑफिस को इसकी कॉपी भेजनी होती है। अगर इस दौरान बीमा कंपनी में कोई आपत्ति नहीं जताई जाती, तो बांड की डुप्लीकेट कॉपी जारी कर दी जाती है। ध्यान रखें अगर सारी प्रक्रियाएं सही ढंग से पूरी करने के बावजूद अगर कंपनी क्लेम का भुगतान नहीं कर रही है, तो आप इसकी शिकायत बीमा नियामक आईएआरडीए से कर सकते हैं।