धनाढ्यों के लिए आया नया आयकर रिटर्न फॉर्म
- 50 लाख से अधिक सालाना आय वालों के लिए अलग फार्म
- नए फार्म में मूल्यवान परिसंपत्तियों की देनी होगी जानकारी
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आयकर विभाग ने 50 लाख रुपये से ज्यादा सालाना कमाने वालों के आयकर रिटर्न के लिए नया रिटर्न फॉर्म अधिसूचित किया है। आकलन वर्ष 2016-17 के लिए जो नए आयकर रिटर्न (आईटीआई) फार्म अधिसूचित किए गए हैं उनमें 50 लाख रुपये सालाना से अधिक कमाई वालों के लिए अलग फार्म है।
इस फॉर्म में कुछ अलग तरह की सूचनाएं मांगी गई है, जो पहले नहीं मांगी जाती थी। नए फॉर्म में बहुमूल्य जेवरात और महंगे वाहन के साथ-साथ हवाई जहाज और यंत्रचालित महंगी नौका (याच) आदि की भी जानकारी मांगी गई है।
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा आकलन वर्ष 2016-17 के लिए जारी आयकर रिटर्न फार्मों में इस बार आईटीआर 2 और आईटीआर 2ए में कुछ विशेष कॉलम जोड़े गए हैं। इनमें वर्ष के दौरान परिसंपत्ति एवं देयताओं (असेट एंड लाइबिलिटी) की जानकारी पूछी गई है। ये फॉर्म साल में 50 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर लागू होता है। नए फॉर्म के मुताबिक इस आय वर्ग में आने वाले व्यक्तियों और इकाइयों को ऐसी परिसंपत्तियों की कुल लागत का भी उल्लेख करना होगा।
यही नहीं, रिटर्न दाखिल करने वाले के नाम कितनी जमीन है, कितने मकान या अन्य अचल संपत्ति है, बैंकों के बचत खाते और घर में कतनी नकदी है, कितने आभूषण हैं, वाहन कौन-कौन से हैं, नाव, पाल वाली नौका (याच) हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर आदि हैं तो उसकी की भी जानकारी देनी होगी। महंगे वाहन या पाल नौका या हवाई जहाज खरीदने में यदि कहीं से लोन लिया गया है और उसकी देनदारी बकाया है, तो उसका भी उल्लेख करना होगा।
रिटर्न में विषमताएं के कारण फॉर्म किया बदलाव
आय कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 50 लाख से ज्यादा आमदनी वाले लोगों के पिछले कुछ साल के रिटर्न का अध्ययन करने के बाद फॉर्म में सुधार किया गया है।
पहले के रिटर्न में देखा गया है कि इस श्रेणी में नौकरी पेशा व्यक्ति की तो जानकारी काफी हद तक ठीक होती है लेकिन पेशेवर या किसी और स्रोत से आमदनी वालों के रिटर्न में काफी विषमताएं पाईं गईं।
इसके बाद ही ये सब सुधार प्रस्तावित किए गए। इस साल इसे मान लिया गया और नए फॉर्म में स्थान मिला है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में काम करने वाले कुछ पेशेवरों ने सीबीडीटी के इस कदम को सकारात्मक करार दिया है। उन्होंने सीबीडीटी की इसलिए भी तारीफ की है कि इस साल वित्त वर्ष की शुरूआत में ही नए फॉर्म अधिसूचित कर दिए गए। पिछले वर्ष इसमें देरी हुई थी।