{"_id":"400aaeee-5697-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"cash-subsidies-companies-snag","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैश सब्सिडी में कंपनियों का रोड़ा","category":{"title":"Personal Finance","title_hn":"पर्सनल फाइनेंस","slug":"personal-finance"}}
कैश सब्सिडी में कंपनियों का रोड़ा
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 04 Jan 2013 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नकद सब्सिडी देने की सरकार की योजना को शुरुआती ब्रेक लगाने में कई बिजनेस कॉरस्पांडेट एजेंट (बीसीए) बनाने वाली निजी कंपनियों का हाथ है। इन कंपनियों ने जहां कर्मचारियों की नियुक्तियों में गलत तरीकों को अपनाया, वहीं तय समय पर बैंकों के लिए आधारभूत ढांचा भी नहीं तैयार किया। जिसकी वजह से 1 जनवरी 2013 से 43 जिलों में नकद सब्सिडी योजना पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पाई।
एक प्रमुख सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि देश में वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आरबीआई के मुताबिक निजी कंपनियों को भी बिजनेस कॉरस्पॉडेंट एजेंट बनाया जा सकता है। इसी के तहत देश को 20 क्षेत्रों में बांटकर निजी कंपनियों को बोली के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियों को ठेका दिया गया।
कंपनियों ने बिना पूंजी की व्यवस्था किए काम के लिए नियुक्तियां भी शुरू कर दी और कोई ढांचा नहीं तैयार किया। इसके तहत बैंकों के पास शिकायतें आईं कि कई कंपनियां नियुक्ति के लिए कर्मचारियों से 1-2 लाख रुपये ले रही हैं। बैंकों ने इसकी शिकायत वित्त मंत्रालय से की। इसके बाद वित्त मंत्रालय की सलाह से ऐसी कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। जिसकी वजह से 31 दिसंबर तक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं हो पाया। अब नए सिरे से खाली क्षेत्रों के लिए काम शुरू किया गया है।
विज्ञापन
इसी के तहत कम्युनिटी सर्विस सेंटर को भी बिजनेस कॉरस्पांडेंट एजेंट बनाया जा रहा है। हालांकि यह सेंटर सभी राज्यों में नहीं है। फिर भी अब कोशिश यह है कि तय समय तक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाए। इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत पीओएस मशीन, गांव में नो-फ्रिल खाते खुलवाने के लिए बिजनेस कॉरस्पांडेट आदि की व्यवस्था करनी होती है। इन कमियों के वजह से सरकार स्कीम के तहत केरोसिन, डीजल, अनाज और खाद पर मिलने वाली सब्सिडी को भी शामिल नहीं कर पाई है।
अरुणा रॉय ने भी सरकार को चेताया
जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने भी वित्त मंत्री को शुक्रवार को पत्र लिखकर कहा है कि सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए आधार की अनिवार्यता पर जोर देना खतरनाक है। इस प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर कई खामियां दिखनी शुरू हो गई हैं। ऐसे में इसमें बिना किसी उचित और बेहतर परीक्षण के आगे निवेश करना नुकसानदेह होगा।
विज्ञापन
एक प्रमुख सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि देश में वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आरबीआई के मुताबिक निजी कंपनियों को भी बिजनेस कॉरस्पॉडेंट एजेंट बनाया जा सकता है। इसी के तहत देश को 20 क्षेत्रों में बांटकर निजी कंपनियों को बोली के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियों को ठेका दिया गया।
विज्ञापन
कंपनियों ने बिना पूंजी की व्यवस्था किए काम के लिए नियुक्तियां भी शुरू कर दी और कोई ढांचा नहीं तैयार किया। इसके तहत बैंकों के पास शिकायतें आईं कि कई कंपनियां नियुक्ति के लिए कर्मचारियों से 1-2 लाख रुपये ले रही हैं। बैंकों ने इसकी शिकायत वित्त मंत्रालय से की। इसके बाद वित्त मंत्रालय की सलाह से ऐसी कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। जिसकी वजह से 31 दिसंबर तक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं हो पाया। अब नए सिरे से खाली क्षेत्रों के लिए काम शुरू किया गया है।
विज्ञापन
इसी के तहत कम्युनिटी सर्विस सेंटर को भी बिजनेस कॉरस्पांडेंट एजेंट बनाया जा रहा है। हालांकि यह सेंटर सभी राज्यों में नहीं है। फिर भी अब कोशिश यह है कि तय समय तक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाए। इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत पीओएस मशीन, गांव में नो-फ्रिल खाते खुलवाने के लिए बिजनेस कॉरस्पांडेट आदि की व्यवस्था करनी होती है। इन कमियों के वजह से सरकार स्कीम के तहत केरोसिन, डीजल, अनाज और खाद पर मिलने वाली सब्सिडी को भी शामिल नहीं कर पाई है।
अरुणा रॉय ने भी सरकार को चेताया
जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने भी वित्त मंत्री को शुक्रवार को पत्र लिखकर कहा है कि सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए आधार की अनिवार्यता पर जोर देना खतरनाक है। इस प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर कई खामियां दिखनी शुरू हो गई हैं। ऐसे में इसमें बिना किसी उचित और बेहतर परीक्षण के आगे निवेश करना नुकसानदेह होगा।