इनकम टैक्स का नोटिस मिले तो न हो परेशान

Advise Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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आयकर विभाग के नोटिस को लोग आमतौर पर आफत का संदेशा मान कर परेशान हो उठते हैं। केवल नोटिस मिलने मात्र से परेशान हो जाना ठीक नहीं। जरूरी नहीं कि नोटिस किसी गड़बड़ी के सिलसिले में ही आया हो। कई बार रूटीन पूछताछ या किसी अन्य तरह की जानकारी के लिए भी असेसिंग ऑफिसर (एओ) नोटिस भेजते हैं। आयकर विभाग का नोटिस मिलने पर परेशान होने के बजाए कुछ खास चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
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नोटिस का मिलान करें
कई बार भूलवश किसी व्यक्ति का नोटिस दूसरे व्यक्ति के पास चला जाता है। हो सकता है कि नोटिस ऐसे ही किसी दूसरे व्यक्ति का हो, जिसका नाम और जन्म तिथि आपसे मेल खाती हो। नोटिस में दिए गए पैन नंबर का मिलान जरूर कर लें। पैन नंबर के आधार पर नाम और पते की गड़बड़ी है आसानी से पता लगाई जा सकती है क्योंकि आयकर विभाग पैन नंबर के आधार पर नोटिस जारी करता है, न कि नाम से।

सुरक्षित रखें कॉपी
नोटिस का गुम हो जाना आपकी मुश्किल बढ़ा सकता है। ऐसे में इसकी फोटो कॉपी या स्कैनिंग करवा कर रख लेना चाहिए। नोटिस ई-मेल से मिलने पर इसे कंप्यूटर पर डाउनलोड करना बेहतर होगा।

नोटिस की तिथि महत्वपूर्ण
आयकर कानून की धारा 143(3) के तहत जिस वित्त वर्ष में रिटर्न दाखिल किया गया है, उसके समापन के छह महीने के अंदर स्क्रूटनी एसेसमेंट का नोटिस भेजा जाता है। अगर नोटिस इसके बाद भेजा जाता है, तो इसे वैध नहीं माना जाएगा। हालांकि टैक्स चोरी का संदेह होने पर धारा 148 के तहत संबंधित कर निर्धारण साल के आखिर से छह साल बाद तक वह नोटिस भेज सकता है। यह राशि अगर एक लाख से कम है तो जांच के लिए समय सीमा महज 4 साल तक होगी।

नोटिस भेजने वाले के बारे में पता करें
नोटिस में उसे जारी करने वाले अधिकारी का नाम और पद जरूर दिया होता है। अधिकारी के हस्ताक्ष, मुहर, दफ्तर का पता और इनकम टैक्स वॉर्ड और सर्कल का जिक्र भी नोटिस में अवश्य होता है। नोटिस ई-मेल से मिलने पर उसका डॉक्युमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन) जरूर देखें।

व्यवस्थित कर लें दस्तावेज
यह भी संभव है कि नोटिस भेजने के लिए आपके रिटर्न को इत्तेफाकन ही जांच के लिए चुन लिया गया हो। इसलिए नोटिस मिलने पर डरने के बजाय आयकर विभाग द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेजों और बाकी सूचनाओं को इकट्ठा करें।

प्रोफेशनल की मदद लें
अगर सिर्फ ज्यादा टैक्स के लिए नोटिस भेजा गया है, तो इससे खुद भी निपटा जा सकता है। मामला थोड़ा उलझाने वाला है, तो किसी टैक्स सलाहकार की मदद लेना बेहतर रहेगा। प्रोफेशनल व्यक्ति को आप रिटर्न के मामले में हुई गड़बड़ी के बारे में सटीक ढंग से बता सकेगा और नोटिस का बेहतर जवाब तैयार करने में आपकी मदद करेगा।
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