एक साल में आएगी नई ई-कॉमर्स नीति, एफडीआई के नियमों में नहीं होगा बदलाव
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ई-कॉमर्स क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार अगले 12 महीने के भीतर राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति लाएगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को हितधारकों सहित ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ अपनी दूसरी बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ई-कॉमर्स में एफडीआई को लेकर सरकार ने मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है।
खुदरा व्यापारियों का हित भी महत्वपूर्ण
गोयल ने कहा कि भारत डाटा और ई-कॉमर्स के अन्य मुद्दों पर दुनिया के साथ जुड़ना चाहता है। लेकिन इसमें पारस्परिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर आगे भी खुदरा और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ चर्चा होगी। इस दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों ने जीएसटी और छूट से संबंधित क्षेत्रीय चिंताओं को साझा किया।
12 महीने में तैयार होगा संस्थागत ढांचा
वहीं, एक अधिकारी ने बताया, ‘हम अगले 12 महीनों के भीतर एक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति लाने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार करेंगे। सरकार ने फरवरी में राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति का मसौदा जारी किया था। हालांकि, कई विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों ने डाटा से संबंधित मसौदे में कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी।
अधिकारी के मुताबिक, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर हितधारकों की शिकायतें दूर करने और ई-कॉमर्स नीति का मसौदा तैयार करने के लिए उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के तहत एक अंतर-मंत्रालयी पैनल का गठन किया जाएगा। बैठक में फ्लिपकार्ट, अमेजन, स्नैपडील, पेटीएम, ईबे, मेकमायट्रिप, स्विगी के प्रतिनिधि शामिल रहे।
साथ काम करने को तत्पर
फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने कहा कि कंपनी एक जीवंत ई-कॉमर्स बाजार और डिजिटल इंडिया बनाने के उद्देश्य के तहत सकारात्मक एवं प्रगतिशील चर्चा के लिए सरकार की सराहना करती है।
हम इस सपने को साकार करने के लिए मंत्रालय और कई अन्य हितधारकों के साथ काम करने को तत्पर हैं। वहीं, वॉलमार्ट के एक प्रवक्ता ने कहा कि मंत्री ने ई-कॉमर्स से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए सकारात्मक पहल की है।