बड़ी छूट और कैशबैक पर आज से लगाम, ई-कॉमर्स कंपनियां नहीं कर सकेंगी खेल
- ई-कॉमर्स में शुक्रवार से नए एफडीआई नियम लागू होने के बाद कंपनियां नहीं कर सकेंगी खेल
- 07 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा भारत में ई-कॉमर्स बाजार 2020 तक
- 10 लाख नौकरियां वर्ष 2023 तक इस क्षेत्र में आने की संभावना है
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विस्तार
ई-कॉमर्स क्षेत्र में शुक्रवार से नए एफडीआई नियम लागू हो जाएंगे, जिसके बाद फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी कंपनियां अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अप्रत्याशित छूट और कैशबैक की लुभावनी पेशकश नहीं दे सकेंगी। देश के खुदरा कारोबारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद सरकार ने यह नियम लागू किया है।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा दिसंबर में जारी नियमों में बेहद सफाई से छूट और कैशबैक के खेल पर लगाम कसी गई है। आर्थिक विशेषज्ञ रामानुज के मुताबिक, अब ई-कॉमर्स कंपनियों की जिन चुनिंदा विक्रेताओं के साथ हिस्सेदारी होगी, उनके माल अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं बेच पाएंगी।
सीधे तौर पर ई-कॉमर्स कंपनियां जब तक ऐसी हिस्सेदारी खत्म नहीं करती हैं, तब तक वह माल बेचने की हकदार नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि पूर्ण स्वामित्व वाली थोक कंपनियों से 25 फीसदी से अधिक माल नहीं खरीदा जा सकेगा, जबकि शेष 75 फीसदी माल विक्रेताओं को दूसरी कंपनियों से खरीदना होगा। इससे लागत बढ़ेगी और बड़ी छूट का खेल बंद हो जाएगा।
निष्पक्ष होगी बिक्री
विशेषज्ञ के अनुसार नए नियमों में निष्पक्ष तरीके से बिक्री की बात कही गई है। ऐसे में कोई भी ई-कॉमर्स पर चुनिंदा विक्रेता व्यक्तिगत तौर पर कैशबैक ऑफर नहीं दे सकेंगे। किसी भी ब्रांड और ई-मार्केट प्लेस के बीच ऑनलाइन होने वाले विशेष सौदेबाजी पर पाबंदी लगा दी गई है।
कोई ब्रांड अपना माल सिर्फ एक ही प्लेटफॉर्म यानी फ्लिपकार्ट या अमेजन पर भारी छूट के साथ नहीं बेच सकेगा। उपभोक्ताओं को तत्काल या जल्द सामग्री भेजने जैसे ऑफर पेश करने वाली सेवाओं को भी भेदभावपूर्ण माना जाएगा।
सिर्फ बीटूबी में 100 फीसदी एफडीआई
नए नियम में सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स के बिजनेस-टू-बिजनेस मॉडल में ही ऑटोमैटिक रूट के जरिये 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। माना जा रहा है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों ने इस नियम की समय-सीमा बढ़वाने की तमाम कोशिशें की, लेकिन खुदरा व्यापारियों के दबाव ने इन प्रयासों को नाकाम कर दिया।
घरेलू कंपनियों को लाभ
विशेषज्ञ यह मानते हैं कि इन नियमों से खुदरा और देसी ई-कॉमर्स कंपनियों को लाभ होगा, लेकिन तेजी से बढ़ रहे इस क्षेत्र की गति कम हो जाएगी। भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र में साल 2023 तक 10 लाख नौकरियां आएंगी, जबकि साल 2020 तक भारत में सालाना ई-कॉमर्स व्यवसाय से होने वाली बिक्री 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं, यह आंकड़ा साल 2026 तक 14 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। अभी यह क्षेत्र सालाना 51 फ़ीसदी की दर से बढ़ रहा है।