पांच साल में पहली बार चीनी खरीदेगा ईरान, तेल के बदले मिले रुपये से होगी डील
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अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा ईरान पांच साल में पहली बार भारत से चीनी खरीदने की तैयारी कर रहा है। मार्च-अप्रैल तक होने वाली यह डील उसी रुपये से की जाएगी, जो भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदते समय भुगतान किया था।
दरअसल, अमेरिका ने प्रतिबंध के तहत ईरान पर वैश्विक वित्तीय तंत्र के इस्तेमाल की रोक लगा दी है। यहां तक कि तेल व्यापार में भी ईरान अमेरिकी मुद्रा डॉलर का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इससे बचने के लिए उसने भारत के साथ रुपये में तेल व्यापार का विकल्प चुना। अब वह अप्रैल तक 22,014 रुपये प्रति टन के हिसाब से 1.5 लाख टन कच्ची चीनी का आयात करेगा।
साल 2019 में ईरान को कुल आयात 4 लाख टन रहने का अनुमान है। ईरान की ओर से इसके बदले में भुगतान भारतीय मुद्रा में किया जाएगा। मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि तेल खरीद का पैसा यूको बैंक की ओर से दिया गया था, जिसका इस्तेमाल अब ईरान कर रहा है। अभी तक ईरान ब्राजील से चीनी की खरीद करता था लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद उसे भारत का रुख करना पड़ा है।
500 रुपये प्रति टन का प्रीमियम
भारत को ईरान अन्य चीनी खरीदारों की अपेक्षा 497 रुपये प्रति टन के हिसाब से प्रीमियम का भी भुगतान करेगा। यह अतिरिक्त भुगतान चीनी की आपूर्ति में देरी को टालने के लिए किया जा रहा है। ईरान के साथ निर्यात बढ़ने से देश का चीनी भंडार खपाने में मदद मिलेगी और भारतीय चीनी निवेशकों को लाभ होगा। 2019 में चीनी की वैश्विक कीमतों में 8.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।