सभी उद्योगों में 10 फीसदी बढ़ सकता है वेतन, नियुक्तियां भी बढ़ने के आसार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 12 Jan 2018 11:04 AM IST
मर्सर, सर्वेक्षण कंपनी
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देश के तमाम उद्योगों में सभी स्तर के कर्मचारियों के वेतन में 10 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है और इस साल कंपनियां कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा कर सकती हैं। मर्सर के 2017 इंडिया टोटल रिम्यूनरेशन सर्वे के मुताबिक, आम तौर पर सभी क्षेत्रों की कंपनियों का इरादा साल 2016 तथा 2017 की तरह ही साल 2018 में भी 10 फीसदी वेतन वृद्धि करने का है।
तमाम उद्योग क्षेत्रों की 791 कंपनियों पर किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, पिछले साल के 48 फीसदी के मुकाबले इस साल 55 फीसदी कंपनियां अगले 12 महीनों के दौरान नई नियुक्तियां कर सकती हैं। टैलेंट कंसल्टिंग एंड इन्फॉर्मेशन सॉल्यूशंस मर्सर में इंडिया बिजनेस लीडर शांति नरेश ने कहा कि आशावादी आर्थिक माहौल तथा सही प्रतिभाओं की कमी की वजह से भारतीय उद्योग दहाई अंकों के निचले स्तर पर विकास का प्रदर्शन जारी रखेगा।

साझा सेवा, हाईटेक कंपनियां करेंगी अधिक नियुक्ति
सर्वेक्षण में कहा गया है कि बीते दो वर्षों की तरह ही दो में से एक कंपनी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है और इस दौड़ में साझा सेवा तथा हाई-टेक कंपनियां सबसे आगे हैं। नरेश ने कहा कि साझा सेवा क्षेत्र में रिटेल, तेज खपत उपभोक्ता वस्तु कंपनी (एफएमसीजी), विनिर्माण तथा फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में कैप्टिव कंपनियों की भरमार है। सप्लाई चेन प्लानिंग, एनालिटिक्स, डिमांड प्लानिंग, कंप्यूटर इमेजरी, स्टोर डिजाइन, मर्चेंडाइजिंग, इत्यादि में नई भूमिकाएं सामने आ रही हैं। कार्य के मूल्य शृंखला के विकास तथा ऐसी रूपांतरकारी भूमिकाओं के उभरने की वजह से कंपनियां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।

नौकरी छोड़ने के प्रति रुझान मामूली घटा
नौकरी छोड़ने के प्रति रुझान पिछले साल की तुलना में इस साल मामूली रूप से घटा है और इसमें 1.8 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले साल यह 13.3 फीसदी था, जबकि इस साल यह 11.5 फीसदी दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि कर्मचारियों को अपने पास बनाए रखने की दृष्टि से शोध एवं विकास व बिक्री पेशेवरों से कंपनियों को चुनौती मिलती है और नियुक्ति के दृष्टिकोण से इंजीनियरिंग व बिक्री पेशेवरों की नियुक्ति को कठिन माना जा रहा है।

उच्च कौशल वाले कर्मियों की कमी
इस बीच, आईबीएम इंडिया/दक्षिण एशिया के वीपी एचआर एवं एचआर हेड दिलप्रीत सिंह के मुताबिक, भारत में कौशल युक्त कर्मचारियों की कमी है और उच्च शिक्षा क्षेत्र इसकी पूर्ति के लिए संघर्षरत है। सिंह ने कहा कि एक नई तरह की नौकरी का उदय हुआ है, जिसे ‘न्यू कॉल जॉब्स’ के नाम से पुकारते हैं, जो क्लाउड, कॉग्निटिव, सिक्योरिटी, डाटा साइंस इत्यादि जैसे क्षेत्रों में संयुक्त तकनीकी कौशल से जुड़ा है और इसके लिए गहरे ज्ञान की जरूरत होगी, जिसकी जड़ें उच्च शिक्षा में जमी हैं।

 

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