{"_id":"604abe798ebc3ee6526ffb39","slug":"indian-economy-will-not-reach-pre-covid-19-levels-before-2022","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूडीज ने कहा: भारतीय अर्थव्यवस्था 2022 से पहले कोविड पूर्व स्तर तक नहीं पहुंचेगी","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
मूडीज ने कहा: भारतीय अर्थव्यवस्था 2022 से पहले कोविड पूर्व स्तर तक नहीं पहुंचेगी
Fri, 12 Mar 2021 06:36 AM IST
Kuldeep Singh
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 12 Mar 2021 06:36 AM IST
विज्ञापन
Moodys
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि भारत सहित ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं 2022 से पहले कोविड पूर्व स्तर तक नहीं पहुंच सकेंगी। मूडीज ने बृहस्पतिवार को जारी वैश्विक रिपोर्ट में कहा कि कोविड-19 की वजह से कर्ज बांटने में गिरावट आई है, जो भले ही कम समय तक रहेगी लेकिन आर्थिक गतिविधियों की गति पर ब्रेक लगा देंगी। इससे ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की गतिविधियां महामारी पूर्व तक 2022 से पहले नहीं पहुंच पाएंगी।
विज्ञापन
मूडीज का अनुमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में बेहद धीमी गति से आ रहा सुधार
मूडीज के अनुसार, कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है और बॉन्ड डिफॉल्ट की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। यह कर्ज बांटने की रफ्तार पर असर डालेगा और लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्षेत्रों पर आगे भी जोखिम बना रहेगा।
विज्ञापन
इसके दबाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में काफी उतार-चढ़ाव आ सकता है, जो पहले ही बेहद धीमी गति से सुधार की ओर बढ़ रही है। हालांकि, कोविड-19 की वैक्सीन आने से 2021 के अंत तक इस महामारी का असर बेहद कम हो जाएगा। जैसे-जैसे वैक्सीन का प्रसार होगा, अर्थव्यवस्थाओं में भी सुधार आता जाएगा।
विज्ञापन
आर्थिक गतिविधियों को मिल सकेगी ज्यादा ढील
मूडीज ने कहा कि वायरस का प्रकोप कम होने से सरकारें आर्थिक गतिविधियों और लॉकडाउन में ज्यादा ढील दे सकेंगी, जिससे 2022 की शुरुआत से ही सुधार की गति बढ़ जाएगी। हालांकि, वायरस का नया रूप बड़ा खतरा बन सकता है, जिसकी वजह से कई देशों में स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन लगाना पड़ेगा।
दुनियाभर में बढ़ा डिफॉल्ट का खतरा : एसएंडपी
वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ जीडीपी के मुकाबले काफी बढ़ चुका है। इससे दुनियाभर में कर्ज डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ता जा रहा है। 2020 के आखिर तक वैश्विक कर्ज 2,001 खरब डॉलर पहुंच चुका है, जो जीडीपी का 267 फीसदी है।
एसएंडपी ने 2021-22 तक इसके 258 फीसदी आने की संभावना जताई है, जबकि 2022-23 में 255 फीसदी तक आ सकता है। महामारी के बाद अर्थव्यवस्थाओं में सुधार इसी बात पर निर्भर करेगा कि कॉरपोरेट, सरकारों और घरेलू कर्ज में कितनी जल्दी कमी लाई जा सकती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 2021 में 5 फीसदी, 2022 में 4 फीसदी और 2023 में 3.6 फीसदी रहने का अनुमान है।