आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मानक तैयार करने के लिए सरकार ने बीआईएस को सौंपी जिम्मेदारी
देश में लगातार बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित डिवाइस की तादाद के मद्देनजर सरकार ने इसके मानक तैयार करने का निर्णय लिया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे वह नीति आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर तैयार करेगा। इन मानकों को लाने का मकसद उपभोक्ता संरक्षण और गुणवत्ता को बरकरार रखना है, ताकि आने वाले दिनों में बिजली, पानी, औद्योगिक क्षेत्र में एआई के उपयोग में कोई परेशानी नहीं आए। थिंक टैंक नीति आयोग ने मेक इन इंडिया के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एबीबी इंडिया के साथ समझौता भी किया है। उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक आयोग का समझौता अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों को अन्य देशों की तर्ज पर एआई पर आधारित करना है, लेकिन मानकों की गैर-मौजूदगी में सही दिशा में इसका विकास होना संभव नहीं है। इसलिए बीआईएस को इसके मानक तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
देरी का विकास पर पड़ेगा असर
दुनिया में मौजूदा समय एआई, बिग डाटा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स की दिशा में तैयारी को लेकर सबसे तेज पड़ोसी देश चीन काम कर रहा है। अगर समय पर मानक नहीं तैयार किए गए, तो इस क्षेत्र में भारत का तेजी से विकास करना संभव नहीं है। याद रहे कि मौजूदा समय गूगल और अमेजन द्वारा एआई पर आधारित दो डिवाइस की बिक्री देश में की जा रही है। इसके अलावा अन्य कंपनियां भी इस क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं, जिसके मद्देनजर भी मानक अनिवार्य हो गए हैं।
चार स्तर पर तैयार होंगे मानक
नीति आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक बिजली, पानी, खाद्य, भारी उद्योग, शिक्षा, सरकारी व्यस्थाएं, रेल-मेट्रो के डिजिटलाइजेशन में एआई अहम भूमिका निभाएगा। आयोग ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई, बिग डाटा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स को लेकर अध्ययन करके रिपोर्ट भी जारी की थी। उनमें की गई सिफारिशों के आधार पर बीआईएस मानक तैयार करेगा। एआई के मानक तैयार किए जाने के बाद बिग डाटा समेत अन्य पर कदम आगे बढ़ाया जाएगा। बीआईएस के अनुसार वह एआई पर चार स्तर पर ग्रेड तैयार कर रहा है।
आईआईटी भी करेगा मदद
इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) से भी सहायता ली जा रही है। मानकों में एआई से जुड़ी डिवाइस में उपभोक्ता संरक्षण और गुणवत्ता का ख्याल रखा जाएगा। मौजूदा समय कोई मानक नहीं होने की वजह से अगर किसी उपभोक्ता को परेशानी आती भी है, तो इस तकनीकी समस्या पर कोई उपचार उसे नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि नीति आयोग और गूगल के बीच भी एआई तथा मशीन लर्निंग को लेकर एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत नीति आयोग ने फ्यूचर टेक्नोलॉजी जैसे एआई में शोध और विकास को लेकर पूरे देश में एक राष्ट्रीय रणनीति का प्रारूप तैयार किया था।