बिना तैयारी के सरकार ने लागू की नोटबंदी, सुधारी जा सकती है GST लागू करने से जुड़ी खामियां: राजन
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भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के सही क्रियान्वयन पर काम किया जा सकता है और यह कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी का फैसला न तो सुनियोजित था और न ही सोच-विचारकर उठाया गया कदम। मोदी सरकार के जीएसटी तथा नोटबंदी जैसे महत्वाकांक्षी सुधारों के बारे में राजन ने कहा कि बेहतर होता कि इन उपायों को बेहतर ढंग से लागू किया जाता।
अंत तक उठाएंगे उंगली
राजन ने बुधवार को कैंब्रिज में हार्वर्ड कैनेडी स्कूल में कहा कि जीएसटी पर हम अंत तक उंगली उठाएंगे। बेहतर होता कि हम इसे वर्तमान के मुकाबले और बेहतर तरीके से लागू कर सकते। लेकिन यह (जीएसटी) ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान नहीं है। हम इसपर काम कर सकते हैं। इस मुद्दे पर हम ऐसे वक्त में उम्मीद नहीं छोड़ेंगे।
पूछा गया था सवाल
शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में कैथेरीन दुसाक मिलर डिस्टिंग्विश सर्विस प्रोफेसर ऑफ फाइनेंस रघुराम राजन ने ‘लीवरेज, फाइनेंशियल क्राइसिस, एंड पॉलिसिज टू रेज इकोनॉमिक ग्रोथ’ विषय पर 2018 अल्बर्ट एच गॉर्डन व्याख्यान दिया। इस दौरान उनसे भारत में जीएसटी तथा नोटबंदी जैसे सुधारों का ‘ठीक ढंग से क्रियान्वयन न करने’ को लेकर सवाल पूछा गया था।
आरबीआई से लिया गया था परामर्श
नोटबंदी के मुद्दे पर राजन ने इस दावे को खारिज किया कि नवंबर 2016 में 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित करने से पहले सरकार ने आरबीआई से परामर्श नहीं लिया था। उन्होंने हालांकि दोहराया कि 87.5 फीसदी करेंसी को रद्द करने का ‘फैसला ठीक नहीं’ था। राजन ने कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि नोटबंदी को लेकर मुझसे परामर्श नहीं किया गया था।
वस्तुत:, मैंने पूरी तरह स्पष्ट किया कि हमसे परामर्श लिया गया था और मुझे नहीं लगता था कि यह बढ़िया विचार था। पूर्व गवर्नर ने कहा कि नोटबंदी सुनियोजित नहीं थी और यह बिना सोच-विचार किए लिया गया फैसला था, यह बात मैंने सरकार से कही थी, जब पहली बार यह विचार व्यक्त किया गया था।
उन्होंने कहा कि कोई भी अर्थशास्त्री यही कहेगा कि अगर 87.5 फीसदी करेंसी को अमान्य घोषित करना है, तो यह बेहतर होगा कि उतनी ही राशि की करेंसी को छापकर सर्कुलेशन के लिया पहले से तैयार रखा जाए।
बिना सोच-विचार किए नोटबंदी
राजन ने कहा कि भारत ने ऐसा कुछ किए बिना नोटबंदी का फैसला ले लिया। इसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा, लेकिन योजना कुछ इस तरह की भी थी कि जिन्होंने अपने घरों के तहखानों में काले धन को छिपा रखा था, वे सरकार के समक्ष आकर काला धन छिपाने के लिए माफी मांगने के बाद उनपर कर अदा कर सकते थे। पूर्व गवर्नर ने कहा कि जो भी व्यक्ति भारत को जानते हैं, वे जानते होंगे कि हम कानून का तोड़ कितनी जल्दी निकाल लेते हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात तो यह थी कि नोटबंदी के तहत जितनी मुद्रा को अमान्य घोषित किया गया था, वह फिर से बैंकिंग तंत्र में वापस लौट आया। इसका अर्थ हुआ कि जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था, वह उस पर खरा नहीं उतरा।
नोटबंदी का दीर्घकालिक असर
लंबे समय तक हालांकि नोटबंदी का असर देखा जा रहा है। इसके नकारात्मक आर्थिक असर में लोगों के पास करेंसी का न होना, भुगतान में समर्थ न होना तथा खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आना शामिल रहा।