भारी खरीद-फरोख्त करने वालों से आयकर विभाग मांगेगा हिसाब, भेजेगा सात लाख नोटिस
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अब आयकर विभाग के चाबुक से वे लोग नहीं बच सकेंगे, जो टैक्स चोरी के जुगाड़ में खुद को माहिर समझते हैं। आयकर विभाग आपके हर उस लेने-देने और खरीद-फरोख्त का हिसाब मांगने वाला है। जिन लोगों ने बिना अपना परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) नंबर दिखाए अपने खातों से भारी लेन-देन किया है, उन्हें जल्द ही आयकर विभाग की जांच से गुजरना पड़ सकता है। विभाग ऐसे सात लाख नोटिस भेजने वाला है। फिलहाल आयकर विभाग ने उन 10 लाख ट्रांजेक्शन्स को चुना है, जिनमें सात साल पहले (2009-10 में) 30 लाख या उससे ज्यादा कीमत की प्रॉपर्टी खरीदी गई, और जिनमें नकद भुगतान शामिल है। एनुअल इंफोर्मेशन रिटर्न के तहत विभाग को हाई वैल्यु डेटा ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है।
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक अशोक महेश्वरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के पार्टनर अमित महेश्वरी ने बताया कि अगर उन्हें आयकर विभाग का नोटिस मिलता है तो पहली आधार यही होगा कि मैंने उस वित्त वर्ष का इनकम टैक्स रिटर्न भरा है या नहीं? अगर इनकम टैक्स दिया गया तो अगला सवाल उठता है कि आय का वह श्रोत क्या है जिसके जरिए खरीद-फरोख्त की गई और भुगतान किया गया? इसलिए सभी को इनकम टैक्स के बारी में जरूरी कागजात तैयार रखने होंगे।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपने 30 लाख रुपए में कोई जायदाद खरीदी है, और उसकी डाउनपेमेंट आपने बैंक लोन से की है, ऐेसे में आपको सारे जरूरी कागजातों को दिखाने के लिए कहा जा सकता है।
इन बिंदुओं पर किए जा सकते हैं सवाल
निवेश और आय में आयकर विभाग के मुताबिक फर्क पाए जाने पर इन बिंदुओं पर सवाल किए जा सकते हैं-
पैन के बिना 10 लाख या उससे ज्यादा का नकद भुगतान किए जाने पर।
पैन के बिना 30 लाख या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने पर।
सालाना इनकम टैक्स रिटर्न जमा नहीं करने पर।
अगर इनकम टैक्स दिया गया है तो उसके फंड या निवेश का श्रोत क्या है?
टैक्स भरे जाने पर भी सवाल हो सकता है।
इन कागजातों को दिखाना पड़ सकता है
फंड के श्रोत की जानकारी के लिए बैंक अकाउंट नंबर।
भुगतानों की जानकारी के लिए क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट्स।