बड़े घाटे में याहू का एक युग खत्म, 33500 करोड़ में वेरिजोन से हुई डील
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इंटरनेट जगत की दिग्गज कंपनी याहू बिक रही है। करीब 5 बिलियन डॉलर में इसकी बिक्री की डील तय हुई है। याहू अरसे तक इंटरनेट की दुनिया में नंबर दो की पोजिशन पर रही। याहू को वेरिजोन कम्युनिकेशन इंक खरीदने जा रही है। याहू को खरीदकर वेरीजोन अपना एओएल इंटरनेट कारोबार बढ़ाएगी।
एओएल को कंपनी ने पिछले साल 4.4 बिलियन डॉलर में खरीदा था, जिसके जरिए याहू के सर्च, मेल, मैसेंजर समेत एडवरटाइजिंग टेक्नोलॉजी टूल की सेवाएं शुरू की गई थीं।
इस डील के बाद याहू अब ऑपरेटिंग कंपनी नहीं होगी। इसकी 15 फीसदी हिस्सेदारी चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड और 35.5 फीसदी याहू जापान कॉर्पोरेशन में है।
2008 में माइक्रोसॉफ्ट के 44 बिलियन डॉलर के ऑफर को ठुकराया
याहू की बोली लगाने में वेरीजोन कम्युनिकेशन इंक सबसे आगे रही और तकरीबन 5 बिलियन डॉलर में डील तय हुई। 2008 में माइक्रोसॉफ्ट से मिले ऑफर को देखते हुए याहू के लिए यह डील सदमा सरीखी है, क्योंकि तब माइक्रोसॉफ्ट ने इसे 44 बिलियन डॉलर की पेशकश की थी, जिसे याहू ने ठुकरा दिया था।
याहू की शुरुअाआत 1994 में की गई थी। स्टेनफोर्ड कॉलेज के छात्र जेरी येंग और डेविड फिलो ने इसे शुरू किया था। इंटरनेट की दुनिया में याहू की हैसियत नंबर दो पर रही। लेकिन फिलहाल कंपनी बुरे दौर से गुजर रही थी, गूगल, फेसबुक इंक और एमाजोन जैसी कंपनियों से याहू को कड़ी टक्कर मिल रही थी।