एफडी पर घट रहा ब्याज, एनसीडी है बेहतर विकल्प, मिलता है 3% तक ज्यादा ब्याज
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एसबीआई सहित लगभग सभी बैंकों ने एफडी की ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है। एफडी पर कमाई घटने के बाद गैर परिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडी) निवेशकों के लिए नया विकल्प बन सकते हैं। इस पर जोखिम कम और एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है। सही एनसीडी का चुनाव कैसे करें इस पर डालते हैं एक नजर,
निवेशकों से लिए कर्ज पर ब्याज देतीं कंपनियां
आनंद रथी वेल्थ मैनेजमेंट के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज ने बताया कि कॉर्पोरेट कंपनियां निवेशकों से पैसे जुटाने के लिए एनसीडी जारी करती हैं, जो एक तरह का ऋण पत्र होता है। इसमें 3, 5 या 10 साल के लिए पैसे लगाए जा सकते हैं। अधिकतर एनसीडी 1,000 रुपये के गुड़क में जारी होते हैं। ये डिबेंचर लॉकइन पीरियड के बाद जारीकर्ता कंपनी के इक्विटी शेयरों में तब्दील नहीं हो पाते, इसीलिए इन्हें गैर परिवर्तनीय डिबेंचर्स कहते हैं। कंपनियां निवेशकों से जुटाए धन पर उन्हें ब्याज का भुगतान करती हैं। इसे सीधे जारीकर्ता कंपनी से या एक्सचेंज पर भी खरीदा जा सकता है। कुछ कंपनियां 8 साल के लिए भी निवेश का विकल्प देती हैं। सभी एनसीडी एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होते हैं।
समय से पहले मुश्किल है धन की निकासी
अगर कोई निवेशक लॉकइन पीरियड से पहले एनसीडी से निकासी करना चाहता है तो उसे एक्सचेंज पर नया खरीदार ढूंढना होगा। कंपनियां इसे परिपक्व होने से पहले वापस नहीं लेती हैं। हालांकि, बैंक एफडी के मामले में आप समय से पहले निकासी कर सकते हैं और बैंक आपकी एफडी तोड़कर कुछ शुल्क वसूलने के बाद शेष पैसा वापस कर देते हैं। एनसीडी के मामले में निवेशक नए खरीदार को बेचकर ही बाहर निकल सकता है। इस पर एफडी के मुकाबले 2 से 3% तक ज्यादा ब्याज मिलता है।
नहीं मिलती है टैक्स छूट
- एनसीडी में निवेश पर आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता है। इस पर ब्याज के रूप में हुई कमाई आपकी आय मानी जाएगी और उस पर स्लैब के मुताबिक आयकर का भुगतान करना पड़ेगा। हालांकि, 5 साल की एफडी पर 80सी में टैक्स छूट मिलती है लेकिन उसके ब्याज पर भी आयकर चुकाना पड़ता है।
- डीमैट खाते से खरीदे गए एनसीडी में स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं होती है, लेकिन एक्सचेंज से फिजिकल फॉर्म में खरीद हुई है तो टीडीएस कटेगा।
- इतना ही नहीं एनसीडी पर सालाना 5,000 रुपये से ज्यादा ब्याज पर भी टीडीएस लगता है, जबकि एफडी पर यह सीमा 10,000 रुपये है।
ये जानकारी भी जरूरी
- एनसीडी में निवेश के लिए निवेशक का डीमैट खाता होना जरूरी है
- लॉकइन पीरियड सोच समझकर चुनें, क्योंकि बीच में वापस नहीं कर सकते
- इस पर ब्याज दर पहले ही तय हो जाती है, जो आखिर तक समान रहती है
- अपनी जरूरत के हिसाब से रिटर्न की अवधि भी पहले ही तय कर लेनी चाहिए
एनसीडी खरीदते समय सिर्फ रेटिंग पर न करें भरोसा
निवेशक एनसीडी खरीदते समय सिर्फ उसकी रेटिंग देखकर ही भरोसा न करें। बल्कि ऐसे कॉर्पोरेट पर दांव लगाया जाए जिसका प्रबंधन और कामकाज भी भरोसेमंद हो। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आज जो रेटिंग किसी कंपनी के एनसीडी को मिल रही है, जरूरी नहीं अगले 10 साल तह वही रेटिंग बरकरार रहे। लिहाजा निवेशक थोड़ी रिसर्च करें - कुंज बंसल, निवेश सलाहकार