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Cryptocurrency News: भारत में डिजिटल करेंसी पर बैन की तैयारी, तो ये देश 2022 में जारी करेगा बिटक्वाइन बॉन्ड
Wed, 24 Nov 2021 01:34 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Wed, 24 Nov 2021 01:34 PM IST
सार
El Salvador To Issue Bitcoin Bond In 2022: डिजिटल करेंसी पर शिकंजा कसने के लिए जहां भारत सरकार शीतकालीन सत्र में बिल पेश करने वाली है। वहीं दूसरी ओर अल साल्वाडोर में बिटक्वाइन सिटी बनाने के साथ ही 2022 में बिटक्वाइन बॉन्ड जारी करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
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क्रिप्टोकरेंसी
- फोटो : istock
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विस्तार
एक ओर जहां चीन में क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है तो दूसरी ओर भारत में भी क्रिप्टाकरेंसी पर बैन लगाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। डिजिटल करेंसी को प्रबंधित करने के लिए केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में बिल पेश करने वाली है और इसको लेकर मसौदा भी तैयार किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर अल साल्वाडोर में बिटक्वाइन सिटी बनाने के साथ ही 2022 में बिटक्वाइन बॉन्ड जारी करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
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ये है अल साल्वाडोर की योजना
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अल साल्वाडोर अगले साल एक बिलियन डॉलर के बिटकॉइन बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहा है। क्रिप्टो कैपिटल को आकर्षित करने के लिए आर्थिक रूप से तनाव झेल रहे मध्य अमेरिकी देश की तरफ से ये एक नई कोशिश है। गौरतलब है कि अल साल्वाडोर इस साल बिटक्वाइन को राष्ट्रीय मुद्रा के तौर पर अपनाने वाला पहला देश बन गया। अब इसकी योजना अमेरिका में एक अरब डॉलर के बॉन्ड बेचने की है। जानकारी के मुताबिक, जारी किए जाने वाले ये बिटक्वाइन बॉन्ड 10 साल में मेच्योर होंगे और इस पर 6.5 फीसदी का ब्याज मिलेगा।
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कनाडा की कंपनी से की साझेदारी
अल साल्वाडोर ने इस योजना के लिए कनाडा स्थित एक डिजिटल एसेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ब्लॉकस्ट्रीम के साथ करार किया है। इस कंपनी के साथ मिलकर बिटक्वाइन बॉन्ड जारी किए जाएंगे। बॉन्ड ब्लॉकचेन पर जारी किए जाएंगे, ये एक डिजिटल लेजर है, जो बैंकों की तरह बिचौलियों के बिना ट्रेडिंग करने में मदद करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके जरिए जो कमाई होगी उस पैसे का आधा हिस्सा पांच साल के लिए बिटकॉइन खरीदने में इस्तेमाल होगा, जबकि बाकी का पैसा बिटकॉइन सिटी से जुड़ी परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा।
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भारतीय निवेशकों में चिंता बढ़ी
क्रिप्टोकरेंसी के अनियमित उतार-चढ़ाव से निवेशकों को बचाने के लिए मोदी सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला कर लिया है। इसके तहत भारत सरकार ने मंगलवार (23 नवंबर) को क्रिप्टोकरेंसी बिल लाने का एलान किया, जिसके तहत देश में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगा दिया जाएगा। हालांकि, आरबीआई द्वारा अपनी डिजिटल करेंसी लाने पर भी चर्चा की जा रही है और कैबिनेट बैठक में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है। लेकिन फिलहाल जो हालात बनते दिख रहे हैं, उसका असर देखें तो भारत के करीब आठ फीसदी लोग जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये निवेश किया है, उनकी चिंता बढ़ गई है।
बिल की खबरों के बाद क्रिप्टो बाजार धड़ाम
बता दें कि मंगलवार को जैसे ही खबर आई कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े बिल ‘द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021’ शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। देखते ही देखते क्रिप्टोबाजार में भूचाल आ गया। इसका असर ये हुआ कि सभी तरह की क्रिप्टोकरेंसी में 25 से 30 फीसदी की गिरावट आ गई।
एक-दो क्रिप्टोकरेंसी ही बचेंगी : राजन
इस बीच रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि अभी इस्तेमाल की जा रही हजारों क्रिप्टोकरेंसी में से मुट्ठी भर ही अस्तित्व में रहेंगी। निवेशक दो वजहों से क्रिप्टोकरेंसी खरीद रहे हैं-एक इसे संपत्ति की तरह जुटाना चाहते हैं और दूसरा इससे भुगतान करना चाहते हैं। ऐसे में क्या हमें भुगतान के लिए 6,000 क्रिप्टोकरेंसी की जरूरत होगी। हमें लगता है कि एक-दो क्रिप्टोकरेंसी को संभालना ही बेहतर रहेगा। वह भी तब जब इसकी तकनीक सरल और व्यापक हो जाए, जिसे करेंसी अथवा नकदी के विकल्प के तौर पर लिया जाए। क्रिप्टोकरेंसी के प्रति अभी निवेशकों का लगाव 17वीं शताब्दी में नीदरलैंड के ट्यूलिप मेनिया की तरह है। हमें आशंका है कि क्रिप्टोकरेंसी का हाल भी अनियंत्रित चिटफंड की तरह न हो, जहां निवेशकों का आया और डूब गया।