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बड़ी राहत: दिवालिया कानून की कार्रवाई में नहीं गिने जाएंगे लॉकडाउन के दिन
Sat, 25 Apr 2020 07:13 PM IST
योगेश साहू
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 25 Apr 2020 07:13 PM IST
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सरकार ने कॉरपोरेट जगत को बड़ी राहत देते हुए दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के प्रावधानों को निलंबित कर दिया है। इन कानूनों के तहत होने वाली कार्रवाई में लॉकडाउन के दिनों को नहीं गिना जाएगा। इस संबंध में सरकार ने शुक्रवार को दो अधिसूचना जारी की हैं। हालांकि अधिसूचना में लॉकडाउन के खत्म होने की तारीख का उल्लेख नहीं है।
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जानकारी के अनुसार, पहली अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए लॉकडाउन की अवधि के दौरान कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत कोई भी गतिविधि जो इस दौरान पूरी नहीं हो सकती है, उसे इस प्रक्रिया की टाइम-लाइन में नहीं गिना जाएगा।
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दूसरी अधिसूचना में भी लॉकडाउन की अवधि को गणना से बाहर किया गया है। इसमें कहा गया है कि परिसमापन (लिक्वीडिशन) प्रक्रिया के तहत आने वाली गतिविधि जो लॉकडाउन के दौरान पूरी नहीं हो सकती है, उसे इस प्रक्रिया की टाइम-लाइन में गणना से बाहर रखा गया है।
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लॉ फर्म सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर गौरव गुप्ते ने कहते हैं कि कानून के तहत सीमित समय-सीमा में कॉर्पोरेट व्यक्ति के संबंध में परिसमापन प्रक्रिया को पूरा करने का प्रावधान है, जब तक कि अधिनिर्णय प्राधिकारी द्वारा इसे विस्तारित नहीं किया जाता है। इसी तरह, एक मॉडल टाइमलाइन दी गई है जिसके भीतर विभिन्न आईबीसी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना चाहिए।
सरकार ने दो दिन पहले लिया था निर्णय
बता दें कि सरकार ने दो दिन पहले कॉरपोरेट जगत को बड़ी राहत देते हुए बुधवार को दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के प्रावधानों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया था। साथ ही कहा था कि वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस निलंबन को एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि बुधवार को कैबिनेट बैठक में ही आईबीसी की धारा 7, 9 और 10 लागू किए जाने पर छह महीने की रोक लगाने का फैसला किया गया था। अब कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों के खिलाफ नए सिरे से दिवालिया प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें वे कंपनियां शामिल नहीं होंगी, जो पहले से ही प्रक्रिया में चली गई हैं।
कोरोना महामारी के बीच कॉरपोरेट जगत को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है, जहां डिफाल्टर को अब न्यूनतम छह महीने तक दिवालिया कानून से छूट मिलेगी। इस कदम से बैंकों को भी अब कर्ज का पुनर्गठन करना होगा। अध्यादेश जारी होने के साथ ही नया नियम लागू हो जाएगा। अभी 90 दिन तक कर्ज न चुकाने पर डिफाल्टर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। नियमों में बदलाव को लेकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही संकेत दे दिए थे।
धारा 7, 9, 10 के मौजूदा प्रावधान
- धारा 7 : यह वित्तीय कर्जदाताओं को डिफॉल्टर्स के खिलाफ दिवालिया प्रावधान शुरू करने का अधिकार देता है।
- धारा 9 : यह संचालन कर्जदाताओं (आपूर्तिकर्ता कंपनियों) को डिफॉल्टर्स के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन का अधिकार देता है।
- धारा 10 : यह डिफॉल्ट करने वाली कंपनी को कॉरपोरेट दिवालिया प्रक्रिया में जाने के लिए आवेदन का अधिकार देता है।