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रिपोर्ट में दावाः निजी क्षेत्र के लिए खराब रहा यह साल, वेतन में बेहद कम इजाफा

Wed, 21 Aug 2019 03:07 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 21 Aug 2019 03:07 PM IST
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worst year for private sector as companies make no salary appraisal for employees

निजी क्षेत्र में सैलरी बढ़ने के मामले में यह साल पिछले एक दशक में सबसे खराब रहा है, जब कर्मचारियों के वेतन में बेहद मामूली इजाफा हुआ है। सेंट्रल फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है। 

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मंदी के चलते नहीं हुए अप्रेजल

निजी कंपनियों में इस साल कर्मचारियों का अप्रेजल भी उस हिसाब से नहीं हुआ है, जितना होना चाहिए। मंदी के चलते इस बार बिक्री काफी नीचे चली गई है। इस वजह से कंपनियों ने कर्मचारियों की सैलरी में ज्यादा इजाफा नहीं किया है। 

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लोगों पर पड़ रही है तीन तरफा मार

बिक्री में कमी, अप्रेजल न होने और नौकरी जाने का खतरा मंडराने से लोगों के ऊपर फिलहाल तीन तरफा मार पड़ रही है। कई कंपनियों ने अपने यहां पर नए लोगों को रखने के लिए भी मना कर दिया है। 

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इन सेक्टर में सबसे ज्यादा असर

जिन सेक्टर में सबसे ज्यादा इस बात का असर देखने को मिल रहा है उनमें बैंकिंग, बीमा क्षेत्र, ऑटो इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक और इंफ्रा शामिल हैं। इन सेक्टर में नए लोगों की भर्ती बिलकुल नहीं हो रही है, वहीं लोगों को निकाला जा रहा है या फिर उनको लंबी छुट्टी पर भेजा जा रहा है। 

6.1 फीसदी बेरोजगारी दर

फिलहाल देश में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी है, जोकि अभी तक के अपने सबसे उच्चतम स्तर पर है। यह पुरुषों में 1977-78 से और महिलाओं में 1983 के बाद सबसे ज्यादा है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार 2017-18 में बेरोजगार लोगो की संख्या 2.85 करोड़ है, जो कि 2011-12 में 1.08 करोड़ थी। वहीं 1999-2000 और 2011-12 में यह आंकड़ा एक करोड़ था। 

4953 कंपनियों में दिखा असर

सीएमआईई के डाटा में बताया गया है कि देश में कार्यरत 4953 कंपनियों में बिक्री 2012-13 से लगातार गिर गई है। 2016-17 और 2017-18 में थोड़ी बहुत रिकवरी देखने को मिली, लेकिन यह पूरी तरह से अस्थाई थी। इसके फेल होने के बाद कंपनियों ने अपने सैलरी बिल में कमी करने का फैसला किया। ऐसा इसलिए ताकि वो अपनी गिरती वित्तीय हालत को थोड़ा सा सुधार सकें। 

अप्रेजल का स्तर दो से पांच फीसदी के बीच

कई बड़ी कंपनियों में इस बार केवल दो से पांच फीसदी के बीच कर्मचारियों का अप्रेजल किया है। जहां पिछले साल कम से कम 10 फीसदी का अप्रेजल कर्मचारियों का हुआ था। कई कंपनियों ने इस साल अप्रेजल भी नहीं किया है। ऐसे में कर्मचारियों को पुरानी सैलरी पर ही काम करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि नौकरी ने लगे रहना ही बड़ी बात है।

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