एजीआर पर मतभेद के बीच कंपनियां कर रहीं भुगतान, अब विसंगतियों पर सवाल पूछेगा डॉट
सकल समायोजित राजस्व (एजीआर) की बकाया राशि को लेकर दूरसंचार विभाग और कंपनियों में मतभेद जारी है।
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इस बीच वोडा आइडिया, एयरटेल और टाटा जैसी कंपनियों ने बकाया मद में और भुगतान कर दिए हैं। अब दूरसंचार विभाग एजीआर पर सहमति बनाने के लिए आकलन में आ रही विसंगतियों पर कंपनियों से सवाल पूछेगा।
मामले से जुड़े सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि दूरसंचार विभाग (डॉट) कंपनियों को पत्र लिखकर एजीआर आकलन में आ रहे फर्क के बारे में स्पष्टीकरण मांगेगा। इसके लिए डॉट ने टेलीकॉम कंपनियों से अपने प्रबंध निदेशकों के नाम और उनके पते की जानकारी देने को कहा है। विभाग ने कहा है कि यह ब्योरा मामले की सुनवाई कर रही अदालत को मुहैया कराया जाएगा। विभाग का यह कदम इसलिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई कंपनियों ने एजीआर का अंतिम रूप से भुगतान करने को कहा है, जो सही आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इससे पहले दूरसंचार विभाग ने कंपनियों से अपने दावे के संबंध में और जानकारियां मुहैया कराने का निर्देश दिया था। उसका कहना था कि कुछ कंपनियों का एजीआर पर किया गया दावा विभाग के आकलन से 70 फीसदी तक कम है।
विभाग और कंपनियों के आकलन में अंतर
दूरसंचार विभाग और कंपनियोें के बकाया एजीआर के आकलन को देखें तो इसमें काफी बड़ा अंतर दिखाई देता है। भारती एयरटेल का दावा है कि उस पर कुल एजीआर बकाया महज 18 हजार करोड़ रुपये है और कंपनी ने इसका भुगतान भी कर दिया है। हालांकि, डॉट के अनुसार एयरटेल पर 35 हजार करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है। इसी तरह, टाटा टेलीसर्विसेज पर विभाग ने 14 हजार करोड़ रुपये का बकाया निर्धारित किया है, जबकि कंपनी के अनुसार यह पांच हजार करोड़ से भी कम है। वोडा आइडिया को विभाग ने सबसे ज्यादा 53 हजार करोड़ चुकाने को कहा है, जबकि कंपनी इसका आधे से भी कम बकाया बता रही है।
वोडा आइडिया, एयरटेल और जियो ने चुकाया 6,043 करोड़ का स्पेक्ट्रम बकाया
विलंबित स्पेक्ट्रम बकाए के रूप में तीनों बड़ी दूरसंचार कंपनियों ने मंगलवार को 6,043 करोड़ रुपये का भुगतान विभाग को किया। डॉट के सूत्रों का कहना है कि वोडा आइडिया ने स्पेक्ट्रम बकाए के रूप में सबसे ज्यादा 3,043 करोड़ रुपये चुकाए हैं। संकट मेें फंसी कंपनी के लिए यह भुगतान करना मुश्किल रहा। यह भुगतान पिछली नीलामियों में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के मद में किया गया है। इससे पहले कंपनी 3,500 करोड़ का भुगतान एजीआर मद में भी कर चुकी है। इसी तरह, एयरटेल ने भी स्पेक्ट्रम के बकाया भुगतान के रूप में 1,950 करोड़ रुपये दूरसंचार विभाग को दिए हैं, जबकि जियो ने इस मद में मंगलवार को 1,053 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। विभाग का कहना है कि कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम बकाया के भुगतान की यह आखिरी किस्त होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल स्पेक्ट्रम भुगतान पर दो साल की छूट देने को मंजूरी प्रदान की थी। यानी कंपनियों को दो साल तक स्पेक्ट्रम के पिछले बकाया का भुगतान नहीं करना होगा।
टाटा ने चुकाया 2,000 करोड़ का एजीआर बकाया
टाटा समूह ने दूरसंचार क्षेत्र की अपनी कारोबारी कंपनी टेलीसर्विसेज के बकाया एजीआर के रूप में दूरसंचार विभाग को अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। कंपनी के सूत्रों ने बताया कि यह भुगतान तदर्थ आधार पर किया गया है। टाटा समूह सरकार को पहले ही 2,197 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। यह तदर्थ 2,000 करोड़ रुपये का भुगतान उसके अतिरिक्त है। हालांकि, दूरसंचार विभाग के आकलन के तहत कंपनी पर एजीआर बकाए के रूप में 14 हजार करोड़ का बोझ है।
भारत आएंगे वोडाफोन समूह के सीईओ
बता दें कि वोडाफोन समूह के सीईओ निक रीड छह मार्च को भारत आ सकते हैं। इस दौरान वे समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान में राहत के लिए दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद से मुलाकात करेंगे। हालांकि इस मामले से वाकिफ एक सूत्र का कहना है कि सरकार की ओर से अभी यह पुष्टि नहीं हुई है।
आईसीयू में है वोडा आइडिया
पिछले माह निक रीड ने कहा था की भारतीय इकाई वोडाफोन आइडिया फिलहाल आईसीयू में है। अगर सरकार से समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान में राहत नहीं मिलती है तो फिर इसका असर आगे देखने को मिल सकता है। सेवाओं को बंद भी किया जा सकता है। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा करते हुए निक रीड ने एक प्रेस नोट में यह बात कही थी।
क्या है एजीआर ?
दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है।