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2G: वीडियोकॉन मांगेगी सरकार से 10 हजार करोड़ का हर्जाना, बिजनेस में लॉस होना बताया बड़ी वजह

Sat, 23 Dec 2017 03:03 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली Updated Sat, 23 Dec 2017 03:03 PM IST
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videocon telecom to seek damages worth 10k crores from government after 2g case verdict
2g spectrum - फोटो : File Photo
देश के सबसे चर्चित 2G केस में दिल्ली की सीबीआई अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद वीडियोकॉन टेलिकॉम ने 10 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना मांगने का प्लान बनाया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2012 में वीडियोकॉन सहित आठ अन्य कंपनियों का टूजी लाइसेंस कैंसिल किए जाने के बाद से इनको बहुत घाटा हुआ था। 
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2015 में वीडियोकॉन ने टीडीसैट में दायर की थी याचिका
2015 में वीडियोकॉन ने टीडीसैट में याचिका दायर की थी। वीडियोकॉन के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, 'गुरुवार को 2जी कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला हमारे उस दावे को मजबूती प्रदान करता है कि अपनी कोई गलती नहीं होने के बाद भी हमें खमियाजा भुगतना पड़ा था।'
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इतना मांगा मुआवजा
 मुआवजे या भरपाई की राशि में 5,449 करोड़ रुपये के नुकसान के साथ ही पूंजीगत व्यय, ऑपरेशनल कॉस्ट, इंटरेस्ट व वित्तीय खर्च, रकम जुटाने का खर्च, परिचालन पूर्व व्यय, नेटवर्क परिचालन लागत आदि शामिल हैं। 
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अन्य कंपनियां भी मांग सकती हैं सरकार से मुआवजा

videocon telecom to seek damages worth 10k crores from government after 2g case verdict
कानूनी पेशे से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अन्य कंपनियां भी ऐसे दावे करने पर विचार कर रही हैं। वीडियोकॉन और अन्य कंपनियां 2जी फैसले के उस हिस्से पर जोर दे सकती हैं, जिसमें सरकार की पहले आओ, पहले पाओ की नीति में स्पष्टïता के अभाव को लेकर आलोचना की गई है।

उच्चतम न्यायालय ने 2012 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पहले आओ, पहले पाओ नीति को अपनाए जाने से न तो वीडियोकॉन को कोई लाभ हुआ और न ही वह लाइसेंस/स्पेक्ट्रम हासिल करने में किसी तरह की गड़बड़ी में लिप्त थी।

सीबीआई ने 2011 में अदालत को बताया था कि वीडियोकॉन के खिलाफ गड़बड़ी करने, आपराधिक या किसी अन्य मामले का कोई साक्ष्य नहीं है। इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय ने 2 फरवरी, 2012 के अपने आदेश में वीडियोकॉन पर कोई जुर्माना भी नहीं लगाया था।

2008 में पहली बार लाइसेंस प्राप्त करने वाली वीडियोकॉन ने नेटवर्क स्थापित करने पर 9,353 करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन 2012 के आदेश के बाद उसे कारोबार बंद करना पड़ा और कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी।

नवंबर, 2012 में कंपनी एक बार फिर स्पेक्ट्रम की नीलामी में शामिल हुई और 6 सर्किलों के लिए स्पेक्ट्रम जीता। मई, 2016 में वीडियोकॉन अपने स्पेक्ट्रम भारती एयरटेल को 4,428 करोड़ रुपये में बेचकर दूरसंचार कारोबार से निकल गई।
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